पीएम मोदी-पुतिन गले मिले, भारत मंडपम में द्विपक्षीय बैठक जारी

Su-57 विमान सौदे पर नजर
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में मुलाकात हुई। दोनों नेताओं ने गर्मजोशी से एक-दूसरे का अभिवादन किया। इसके बाद भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय बैठक शुरू हुई। यह मुलाकात 12 और 13 सितंबर को होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले हो रही है।
बैठक में दोनों देशों के बीच रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, तकनीक और रणनीतिक सहयोग से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। रूस के साथ रक्षा संबंधों को मजबूत करने के अलावा एस-400 मिसाइल सिस्टम की अगली डिलीवरी और ब्रह्मोस मिसाइल के नए संस्करण पर भी बातचीत संभावित है।
Su-57 विमान खरीद सकता है भारत
बैठक के एजेंडे में रूस के अत्याधुनिक Su-57 लड़ाकू विमान की संभावित खरीद भी शामिल बताई जा रही है। Su-57 को पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर जेट माना जाता है, जिसे रडार पर पकड़ना मुश्किल होता है। इसकी स्टील्थ क्षमता, लंबी दूरी तक मारक क्षमता और आधुनिक हथियार प्रणाली इसे एयरस्ट्राइक तथा हवाई युद्ध में महत्वपूर्ण बनाती है।
रिपोर्टों के अनुसार, भारत और रूस के बीच Su-57 की संभावित बिक्री को लेकर चर्चा हो सकती है। हालांकि, अभी तक इस सौदे पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। यदि भारत इस विमान को खरीदने का निर्णय लेता है, तो इससे भारतीय वायुसेना की लड़ाकू क्षमता को मजबूती मिल सकती है।
S-400 और ब्रह्मोस पर भी चर्चा
मोदी-पुतिन बैठक में एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम की अंतिम यूनिट की डिलीवरी और ब्रह्मोस मिसाइल के अगले संस्करण के विकास पर भी चर्चा होने की संभावना है। दोनों देश ब्रह्मोस के अपग्रेड, संयुक्त उत्पादन और संभावित निर्यात सहयोग को आगे बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं।
भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग लंबे समय से रणनीतिक साझेदारी का प्रमुख आधार रहा है। मौजूदा बैठक में दोनों देश पारंपरिक रक्षा खरीद से आगे बढ़कर संयुक्त विकास, तकनीकी सहयोग और उत्पादन पर जोर दे सकते हैं।
ब्रिक्स सम्मेलन से पहले अहम मुलाकात
भारत इस वर्ष ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है और 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन नई दिल्ली में आयोजित किया जा रहा है। सम्मेलन में रूस के अलावा चीन, ईरान, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका और अन्य सदस्य देशों के नेता शामिल हो रहे हैं।
मोदी-पुतिन की मुलाकात को भारत-रूस संबंधों के लिहाज से अहम माना जा रहा है। बैठक के दौरान क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों के साथ-साथ दोनों देशों के बीच आर्थिक और रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने पर भी विचार-विमर्श हो सकता है।









