ब्रिक्स की इकोनॉमी अमेरिका से 3 गुना बड़ी

भारत में 10 साल बाद साथ दिखेंगे मोदी-पुतिन-जिनपिंग
नई दिल्ली। भारत की मेजबानी में 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित हो रहा है। सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग एक साथ नजर आएंगे। करीब 10 साल बाद तीनों नेताओं की भारत में एक साथ मौजूदगी को कूटनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है।
इस सम्मेलन में ब्रिक्स के सदस्य देशों के अलावा आमंत्रित देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों सहित करीब 20 देशों के नेता एवं वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल होंगे। सम्मेलन में वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार, निवेश, ऊर्जा सुरक्षा, तकनीक, आपूर्ति शृंखला और बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी।
अमेरिका से करीब तीन गुना बड़ी इकोनॉमी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स की बढ़ती आर्थिक ताकत का उल्लेख करते हुए कहा है कि समूह अब दुनिया की करीब 50 प्रतिशत आबादी, लगभग 40 प्रतिशत वैश्विक GDP और 25 प्रतिशत अंतरराष्ट्रीय व्यापार का प्रतिनिधित्व करता है। क्रय शक्ति समानता (PPP) के आधार पर ब्रिक्स देशों की संयुक्त अर्थव्यवस्था अमेरिका की अर्थव्यवस्था से करीब तीन गुना बड़ी मानी जा रही है।
ब्रिक्स का विस्तार होने के बाद इसका आर्थिक और राजनीतिक प्रभाव लगातार बढ़ा है। भारत, चीन, रूस, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के साथ अब मिस्र, ईरान, इथियोपिया, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया जैसे देश भी समूह का हिस्सा हैं।
मोदी-पुतिन-जिनपिंग की मुलाकात पर दुनिया की नजर
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच 11 सितंबर को द्विपक्षीय बैठक हुई। दोनों नेताओं ने रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, निवेश और रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा की। भारत और रूस ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य भी सामने रखा है।
वहीं, मोदी और शी जिनपिंग के बीच प्रस्तावित मुलाकात पर भी पूरी दुनिया की नजर है। दोनों नेताओं की बैठक में सीमा विवाद, व्यापार घाटा, बाजार पहुंच, निवेश और रणनीतिक आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दे उठ सकते हैं। यह मुलाकात भारत-चीन संबंधों में तनाव कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
डॉलर पर निर्भरता कम करने पर जोर
ब्रिक्स सम्मेलन में सदस्य देश स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने और अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने के विकल्पों पर भी चर्चा कर सकते हैं। इसके अलावा भुगतान व्यवस्था, वित्तीय सहयोग, नई तकनीक और वैश्विक आपूर्ति शृंखला को मजबूत बनाने पर जोर रहेगा।
भारत की प्राथमिकता ब्रिक्स को किसी एक देश के खिलाफ गठबंधन बनाने के बजाय आर्थिक सहयोग, विकास और ग्लोबल साउथ की आवाज मजबूत करने वाले मंच के रूप में आगे बढ़ाना है। सम्मेलन के दौरान आतंकवाद, पश्चिम एशिया और यूक्रेन संघर्ष जैसे वैश्विक मुद्दों पर भी विचार-विमर्श होने की संभावना है।
दिल्ली में सुरक्षा के कड़े इंतजाम
ब्रिक्स सम्मेलन को देखते हुए नई दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। प्रमुख मार्गों पर यातायात प्रतिबंध और रूट डायवर्जन लागू किए गए हैं। विदेशी राष्ट्राध्यक्षों और वरिष्ठ प्रतिनिधियों की आवाजाही को देखते हुए दिल्ली पुलिस तथा सुरक्षा एजेंसियों ने विशेष व्यवस्था की है।









