वीआईपी रेस्ट हाउस में एक मिनट के अंतर पर दो मीटिंग एक में छह और दूसरे में तीन मेंबर, फिर महापौर मान गए

दो दिन से ट्रबल शूटर लगे थे मसला सुलझाने में, महापौर अड़े तो फिर सीएम तक पहुंचाया संदेश
उज्जैन में बदलती राजनीति की जमीन
अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। राष्ट्रीय अध्यक्ष के वाहन से उतारे जाने से खफा महापौर मुकेश टटवाल का मौन सत्याग्रह यूं ही नहीं टला, शनिवार को वीआईपी रेस्ट हाउस में एक मिनट के अंतर पर दो मीटिंग हुई। एक में सीएम सहित छह लोग बैठे तो दूसरी में सीएम सहित तीन ल। दूसरी मीटिंग में सीएम के जादू ने काम किया और महापौर ने मौन सत्याग्रह टाल दिया। दो दिन से भाजपा के ट्रबल शूटर मामले को सुलझाने में लगे थे।
दरअसल, गुरुवार की शाम महापौर मुकेश टटवाल को रोड शो के दौरान राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के रथ से उतार दिया गया था। इस असहज स्थिति से शांत स्वभाव के महापौर ने चार साल के कार्यकाल में पहली बार रविवार को मौन सत्याग्रह करने का ऐलान किया था। उनके साथ बैरवा समुदाय भी तनकर खड़ा हो गया था। एकाएक नगर भाजपा में उपजी इस स्थिति को संभालने की कोशिश शुक्रवार से शुरू हुई थी, जब सीएम डॉ. मोहन यादव के ट्रबल शूटर प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल, सिंहस्थ मेला प्राधिकरण अध्यक्ष जगदीश अग्रवाल और विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा की टीम ने मैदान संभाला।
हालांकि करीब एक घंटे की चर्चा के बाद भी जब उस दिन महापौर टस से मस नहीं हुए तो सीएम से महापौर की सीधी बात कराना तय किया गया। इसके लिए शनिवार का दिन तय हुआ। सीएम इस दिन उज्जैन में रहने वाले थे और उन्हें तीन कार्यक्रमों में शिरकत करनी थी और शाम को वापस भोपाल लौटना था। मगर मामला पेचीदा होने से सीएम ने उज्जैन पहुंचने का समय भी जल्दी का किया और रात भी उज्जैन में रुकना तय किया।
प्राकट्य उत्सव कार्यक्रम से भेजा संदेश, वीआईपी बंगले पहुंचे
हो टल अंजुश्री में चल रहे कार्यक्रम से ही महापौर और बैरवा समुदाय के प्रतिनिधियों को वीआईपी बंगले पर पहुंचने का संदेश पहुंचाया गया। सीएम ने इस काम में अपने पुराने साथी पूर्व महापौर मदनलाल ललावत, मीना जौनवाल और पार्षद राजेश जारवाल को आगे किया। तीनों बैरवा समुदाय से हैंं और भाजपा के अनुशासित सदस्य हैं। इसमें जारवाल को आगे रखा गया। वे बैरवा युवा महासभा के प्रदेश अध्यक्ष हैं और पहले बागपुरा(अब महाकाल सिंधी कॉलोनी) में रहते थे। टटवाल भी यहीं रहते हैं। दोनों पक्के दोस्त हैं। एक ही समाज से हैं। जारवाल शनिवार सुबह से सक्रिय हुए और उन्होंने महापौर के साथ कई मीटिंग की और आखिरकार उन्हें मना लिया।
सीएम ने पहले 5 लोगों के साथ बात की , फिर दो से अलग चर्चा
वीआईपी रेस्टहाउस में सीएम डॉ. मोहन यादव, महापौर मुकेश टटवाल, प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल, विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, सिंहस्थ मेला प्राधिकरण अध्यक्ष जगदीश अग्रवाल और राजेश जारवाल ने बातचीत शुरू की। करीब आधे घंटे तक यह मीटिंग चली। फिर एक मिनट बाद सीएम ने महापौर से जारवाल की मौजूदगी में चर्चा की और स्थिति जानी। सीएम ने गुरुवार के घटनाक्रम को गलत माना और कहा कि इस संबंध में वे अफसरों को अलग से बताएंगे।
कमिश्नर और एडीजी को बुलाया, समझाया
इस मीटिंग के बाद कमिश्नर आशीषसिंह और एडीजी राकेश गुप्ता को बुलाया और सीएम ने उनसे कहा कि प्रोटोकॉल से जुड़े मामले में एक बार आप लोग भी समीक्षा कर लिया करें। कई मर्तबा नीचे के अफसर दूसरों के प्रभाव में आ सकते हैं। दोनों मीटिंग के बाद तय हो गया था कि महापौर रविवार को मौन सत्याग्रह नहीं करेंगे।
सीएम के साथ दो मीटिंग में निकला हल
सीएम के साथ दो मीटिंग हुई। दोनों में हल निकला। पूरा समाज साथ खड़ा था। सभी ने पहल की। सीएम ने भी हमारी बातें ध्यान से सुनी। उन्होंने सीनियर अफसरों को भी अलग से बुलाकर निर्देश दिए हैं। एक सुखद पटाक्षेप हो गया।
-राजेश जारवाल,
अध्यक्ष मध्यप्रदेश बैरवा युवा महासभा
सभी के सहयोग से मामला सुलझ गया
आप सभी के सहयोग से मामला सुलझ गया है। मैंने विरोध का कभी नहीं कहा था, मैंने तो सिर्फ मौन सत्याग्रह और आंबेडकर प्रतिमा पर माल्यार्पण की बात की थी। पूरा समाज और मीडिया साथ खड़ा रहा। सीएम ने सारी बातें ध्यान से सुनी हैं। सभी का धन्यवाद।
-मुकेश टटवाल, महापौर









