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मैं सम्मान कराने नहीं , आपसे मिलने के लिए यहां आया हूं : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

ताबड़तोड़ तय हुआ आस्था गार्डन का कार्यक्रम, सभी से मिले सीएम

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मीटिंग में अन्य लोगों के नाराज होने का मसला भी सामने आया। ऐसे में आस्था गार्डन में डिनर कार्यक्रम में सीएम ने सबसे मिलना तय किया।उन्होंने कहा कि वे इस कार्यक्रम में सबसे मिलना चाहेंगे। नगर अध्यक्ष संजय अग्रवाल को वरिष्ठ लोगों को आमंत्रित करने के निर्देश दिए गए। इसके बाद ताबड़तोड़ उन लोगों तक भी उनके फोन गए, जिनको पहले बुलाया तक नहीं जाता था। एक सीनियर पार्टी नेता ने बताया कि नगर अध्यक्ष ने उनके डेढ़ साल के कार्यकाल में पहली बार उन्हें फोन किया।

सीएम रात 8.30 बजे कार्यक्रम में पहुंचे तो उनका सम्मान शुरू हो गया।ऐसे में वे सीधे पोडियम पर पहुंचे और बोले मैं सम्मान कराने नहीं , आपसे चर्चा करने आया हूं। लोग नहीं माने तो उनके भाव को देखते हुए सीएम ने सम्मान कराया और फिर मंच से नीचे उतरकर हर एक शख्स से पर्सनल मुलाकात की।

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सीएम ने देखें सिंहस्थ के काम, बच्चें से मिलाया हाथ

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जैन मंदिर में आश्रयगृह की रखीं नींव

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। सीएम डॉ. मोहन यादव ने रविवार को सिंहस्थ के काम देखें और इस दौरान बच्चों से हाथ भी मिलाया। फ्रीगंज में उन्होंने जैन मंदिर के आश्रयगृह की नींव भी रखी।

सीएम ने सुबह करीब 10 बजे फ्रीगंज में कंट्रोलरूम के  पास स्थित जैन मंदिर पहुंचे और आश्रय भवन की आधारशिला रखी। यहां से वे कवेलू कारखाने की तरफ पहुंचे और गैल-नीलगंगा रोड पर चल रहा निर्माण कार्य देखा। इस दौरान लोगों से उन्होंने मुलाकात की। खासकर सड़क के किनारे खड़े बच्चों से उन्होंने हाथ मिलाया, राहगीरों से चर्चा की। इस दौरान लोगों ने फूल बरसाकर उनका स्वागत किया। सड़क का मुआयना करने के बाद वे आईटी पार्क गए । यहां से लौटते समय वे महामृत्युंजय द्वार पर ठहरे और उसे देखा। यूनिटी मॉल का काम भी उन्होंने बाहर से देखा। इंदौर रोड पर ही स्थित केजीसी सेलिब्रेशन में एक कार्यक्रम में शरीक हुए।

सिंहस्थ के लिए उज्जैनवासियों का योगदान अतुलनीय
सीएम ने कहा कि सिंहस्थ की तैयारियों के लिए उज्जैनवासियों का योगदान अतुलनीय है। वे मंदिर हटा रहे हैं, मकान हटा रहे हैं, दुकान हटा रहे हैं। ऐसी परिस्थिति में भी वे फूल बरसाकर स्वागत कर रहे हैं। इसके लिए उज्जैनवासी धन्यवाद के पात्र हैं।

उज्जैन-इंदौर की इकॉनमी बदली
महाकाल महालोक ने उज्जैन-इंदौर की इकॉनमी बदल दी है। हर साल यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ रही है। पिछले साल ८ करोड़ लोग उज्जैन आए थे, इस बार यह संख्या 12 करोड़ पहुंच गई है। प्रदेश में आने वाला हर दूसरा शख्स उज्जैन आ रहा है। इससे उज्जैन और इंदौर दोनों ही आर्थिक तौर पर मजबूत हो रहे हैं।

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