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सिंधिया पगड़ी पहन निकले कोतवाल

धूमधाम से निकली कालभैरव सवारी

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उज्जैन। भाद्रपक्ष के शुक्ल पक्ष की एकादशी पर बाबा महाकाल के कोतवाल कालभैरव सवारी धूमधाम से निकली। शाम चार बजे सिंधिया परिवार की पगड़ी कालभैरव को धारण कराई गई। फिर उन्हें पालकी में बैठाया गया। सशस्त्र पुलिस बल के जवानों ने पालकी के आगे मोर्चा संभाला और कदमताल करते हुए निकले।

सेंट्रल जेल के कैदियों ने बड़े दरवाजे से बाबा की पालकी को निहारा। हालांकि जेल गेट पर पालकी का भव्य स्वागत किया गया। इस दौरान थोड़ी देर के लिए पालकी यहां ठहरी भी। इस दौरान पालकी पर फूल बरसाए गए। पालकी के स्वागत के लिए बंदियों ने सुंदर रंगोली भी उकेरी थी। इस दौरान महिला कैदियों ने भजन गुनगुनाए तो पुरुष बंदियों ने जयकारे लगाए। सवारी पूजन के लिए सिद्धवट पहुंची। यहां से बृजपुरा होते हुए फिर से मंदिर लौटी।

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रास्ते भर पालकी का स्वागत किया गया। परिर्वतन एकादशी पर रि साल सवारी निकाली जाती है। सेंट्रल जेल के अधीक्षक मनोज साहू ने बताया कि डोल ग्यारस के दिन बाबा जेल परिसर में भ्रमण करते हैं। साल में दो बार सवारी आती है। इस दौरान बंदियों को आशीर्वाद दिया जाता है। इस बार भी बाबा का स्वागत किया गया। इस दौरान बंदियों में खासा उत्साह देखा गया।

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