कल से दस दिनी शारदीय नवरात्र की धूम, इस बार हाथी पर सवार होकर आएंगी मां

बाजार में रौनक लौटी, पूजन सामग्री, मूर्तियों का मार्केट सजा, गरबा मंडलों ने पंडाल गाड़े
उज्जैन। पश्चिम भारत का उमंग, आस्था, मौज और मस्ती का सबसे बड़ा पर्व शारदीय नवरात्र रविवार से शुरू हो रहा है। उत्सव की इस बार खास बात यह है कि इस बार नवरात्र दस दिन के रहेंगे और मां हाथी पर सवार होकर आएंगी।
अब तक सूने रहे बाजार में रौनक लौट आई है। पूजन सामग्री, मूर्तियों का मार्केट सज चुका है। गरबा मंडलों ने अपने तंबू गाड़ दिए हैं। बस इंतजार शुभ मुहूर्त में प्रतिमा स्थापना का है। दिन भर व्रत-उपवास और रात गरबों की मस्ती का रंग छाने वाला है।
दरअसल, शारदीय नवरात्र का इंतजार पूरे साल रहता है। इसकी वजह होती है, गरबे। देर शाम से शुरू होने वाले गरबे देर रात तक चलते हैं। उज्जैन में पारंपरिक के साथ डीजे और फिल्मी गानों पर भी गरबे होते हैं। इनमें बड़ी संख्या में भीड़ उमड़ती है।
गजवाहन पर आना माना जाता है शुभ
श्री महाकालेश्वर ज्योतिष शोध संस्थान के पंडित रामचंद्र शास्त्री के मुताबिक माता का हाथी से आना शुभ माना जाता है। इस बार मां गज वाहन से आएंगी। यह स्थिति राष्ट्र के व्यापार और श्री में वृद्धि करने वाली होगी।
दो सप्तमी का संयोग: नवरात्र पर इस बार दो सप्तमी रहेंगी। १७-१८ अक्टूबर को सप्तमी दोनों समय उदयकाल में है। इस कारण नवरात्र नौ से बढक़र १० दिन के होंगे। नवरात्र के दिनों की संख्या का बढऩा बहुत ही दुर्लभ एवं शुभ योग माना जाता है।
१८ को अष्टमी, १९-२० को नवमी: महाअष्टमी १८ अक्टूबर को होगी, जबकि नवमी १९ और २० अक्टूबर को। १९ को सूर्योदय काल में अष्टमी मान्य होगी। नवमी १९ को सुबह १०.५१ बजे शुरू होगी और यह २० अक्टूबर को दोपहर १२.५० बजे तक रहेगी। इसके बाद दशमी तिथि शुरू हो जाएगी। चूंकि रावण दहन शाम को होता है, ऐसे में दशहरा २० अक्टूबर को ही मनेगा।
घटस्थापना के मुहूर्त
कलश स्थापना
रविवार: सुबह ६.२२ से ७.५४
अभिजीत मुहूर्त सुबह ११.३० से दोपहर १२.३०
16 अक्टूबर सरस्वती पूजा, बिल्व वृक्ष और बिल्वपत्र का अभिमंत्रण एवं पूजन
18 अक्टूबर महाअष्टमी व्रत एवं रात में महानिशा पूजन
19 अक्टूबर महानवमी, कन्यापूजन, हवन एवं पूर्णाहुति
20 अक्टूबर विजयदशमी पूजन।
प्रतिमा विसर्जन
शाम- 4:05 तक
व्रत का पारण शाम 4:30 से
शक्तिपीठ में तडक़े से रात 11 तक दर्शन :
51 शक्तिपीठों में से एक मां हरसिद्धि में ब्रह्म मुहूर्त (सुबह ६.१९ बजे) में घटस्थापना होगी। घटस्थापना बाद विशेष आरती होगी और मां का मूल स्वरूप गुप्त रहेगा। महंत रामचंद्र गिरी के अनुसार रजत विग्रह इस दौरान स्थापित किया जाएगा। ९ दिनों तक माता का जागरण रहेगा। वह शयन नहीं करेंगी। सतत मां अपनी सिद्धियों को आवर्तन करेंगी। सुरक्षा की दृष्टि से मंदिर का केवल सिंह द्वार बंद रहेगा। रजत द्वार पूरे समय खुला रहेगा। दर्शन तडक़े से शुरू होंगे और रात ११ बजे तक चलेंगे।









