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विक्रम कार्यपरिषद : लिफाफों पर बात खूब, पर राजभवन के डर से नहीं खोले

23 को फिर से होगी बात, दो गेस्ट फैकल्टी के वेतनमान का मुद्दा भी उठा

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय की बुधवार को हुई कार्यपरिषद में टीचर के प्रमोशन पर बात तो खूब हुई लेकिन राजभवन के लेटर के डर से लिफाफे नहीं खोले गए। दो गेस्ट फैकल्टी को यूजीसी वेतनमान देने के मुद्दे पर भी विचार हुआ, हालांकि फैसला टाल दिया गया। अब 23 अक्टूबर को एक बार फिर कार्यपरिषद बैठेगी और फाइनल फैसला करेगी।

दरअसल, कार्यपरिषद में 32 बिंदु चर्चा के लिए रखे गए थे। इसमें सबसे महत्वपूर्ण 18 टीचर के प्रमोशन के बंद लिफाफे खोलने और पत्रकारिता एवं जनसंचार अध्ययनशाला की गैस्ट फैकल्टी सुशील शर्मा और अजय शर्मा को यूजीसी वेतनमान देने के थे। एजेंडे के अन्य बिंदुओं से हटकर सबसे ज्यादा चर्चा ही इन पर हुई।

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बंद लिफाफे के बारे में चर्चा इसलिए शुरू करनी पड़ी कि हाईकोर्ट ने डॉ.गणपत परिहार, डा. निश्चल यादव और डॉ. पवेंद्रनाथ तिवारी के मामले का साफ करने का कहा है।तीनों के नाम उन 18 लोगों में शामिल हैं, जिनके लिफाफे बंद हैं। इस मसले में राजभवन के लेटर का हवाला देकर फिलहाल कोई फैसला नहीं लिया जा सका।

पूर्व मंत्री ने कर रखी है शिकायत
दरअसल, पूर्व मंत्री रामनिवास रावत ने 18 में से 11 नामों पर नियुक्ति प्रोसेस, कोर्ट , जांच आदि का हवाला देकर जांच की मांग की है। ऐसे में मसला रुक गया।

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गेस्ट फैकल्टी को यूजीसी वेतनमान अभी नहीं
पत्रकारिता एवं जनसंचार अध्ययनशाला की गेस्ट फैकल्टी सुशील शर्मा और अजय शर्मा को यूजीसी वेतनमान देने पर भी विचार हुआ। एक सदस्य का कहना था कि अगर इन्हें वेतनमान दिया जाता है तो बाकी अन्य को भी लाभ मिलेगा। सदस्य का तर्क था कि दोनों स्थानीय निवासी हैं।

अगर इन पदों को विज्ञापन के जरिये भरा गया तो बाहरी लोग आ सकते हैं। ऐसे में स्थानीय लोगों का नुकसान हो सकता है। फिलहाल तकनीकी पाइंट को देखते हुए इसे टाल दिया गया। गौरतलब है कि गेस्ट फैकल्टी को 50 हजार रुपए मानदेय दिया जाता है। यूजीसी वेतनमान में यह राशि बढ़कर 1.50 लाख रुपए हो जाएगी।

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