पार्श्वनाथ कॉलोनी कॉलोनी में 12 महीने बना रहता है पेयजल का संकट

पाइप लाइन नहीं, बोरिंग से आता है प्रदूषित पानी
1 हजार प्लॉट वाली कॉलोनी में रह रहे हैं 400 परिवार, रहवासी कई बार शिकायत कर चुके परंतु निराकरण नहीं हुआ
अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। देवास रोड पर औद्योगिक क्षेत्र के पास स्थित पार्श्वनाथ कॉलोनी में जल संकट 12 महीने लगातार बना रहता है। कॉलोनी में पेयजल की पाइप लाइन नहीं है और उद्योगों द्वारा नाले में छोड़े जा रहे केमिकल वेस्ट से भूमिगत जल भी प्रदूषित हो गया है। केमिकल वेस्ट इतना बदबूदार है कि कोई व्यक्ति नाले के पास खड़ा नहीं रह सकता। यह नाला नागझिरी मुख्य सड़क से होकर गुजरता है। नाले के पास बनी चार-पांच दुकानों के संचालक अपनी दुकान बेच चुके हैं। शिकायत करने पर एसडीएम ने पेयजल के लिए टैंकर से नियमित पानी भिजवाने का आश्वासन दिया है।
नागझिरी में औद्योगिक क्षेत्र की बाउंड्रीवाल से लगी हुई पार्श्वनाथ कॉलोनी है। 101 एकड़ में बसी इस कॉलोनी में करीब एक हजार प्लॉट हैं जिनमें से 400 प्लॉट पर लोगों ने घर बना लिए हैं। कॉलोनी की जमीन पर पूर्व में पाइप फैक्टरी (इस्को पाइप फैक्टरी) थी जो बंद हो गई। फैक्टरी की जमीन नीलाम हुई और फिर राजस्व रिकार्ड में नोइयत (भूमि उपयोग का उद्देश्य) परिवर्तन करवाकर 2002 में यहां कॉलोनी बस दी गई। अच्छी बसाहट के चक्कर में अधिक आय वर्ग वालों ने यहां प्लॉट खरीदे, अब यह लोग ही परेशानियों से जूझ रहे हैं।
उद्योगों ने जमीन पर कब्जा कर लिया शासन ने अनुमति निरस्त कर दी पर फैक्टरियां अब भी संचालित
कॉलोनी से सटे देवासरोड औद्योगिक क्षेत्र की भूमि पर 11 फैक्टरियां और वर्कशॉप संचालित हो रहे हैं। इन उद्योगों को कॉलोनी को अलग करने के लिए कॉलोनी और औद्योगिक क्षेत्र के बीच 60 फीट जमीन छोड़ी गई थी। परंतु इस जमीन पर सभी 11 उद्योगों ने कब्जा कर बाउंड्रीवाल बना दी है। शिकायत मिलने पर उद्योग विभाग ने सभी 11 उद्योगों को 25 सितंबर तक अतिक्रमण हटाने की चेतावनी दी थी। अतिक्रमण नहीं हटाने पर उद्योगों की अनुमति निरस्त कर दी है। अनुमति तो निरस्त हो चुकी है परंतु सभी उद्योग अब भी संचालित हो रहे हैं और विभाग द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
गलत जानकारी देते हैं विभाग
कॉलोनी के लोग ध्वनि प्रदूषण, केमिकल प्रदूषण और जहरीली गैस के प्रदूषण से परेशान हैं। रहवासियों ने बताया संबंधित विभागों की शिकायत जनसुनवाई और सीएम हेल्प लाइन पर की परंतु अधिकारी निराकरण की गलत जानकारी देकर शिकायत कटवा देते हैं।
एक केमिकल फैक्टरी के प्रदूषण की स्थिति तो ऐसी है कि फैक्टरी में काम करने वाले 8 कर्मचारियों को सुनाई पडऩा 80 प्रतिशत कम हो गया है। सभी पीडि़तों ने उद्योग विभाग में शिकायत की और संतोषजनक कार्रवाई नहीं होने पर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।
सूचना के अधिकार में माना कि प्रदूषण स्तर सामान्य से ज्यादा है
शिकायतकर्ता कॉलोनी के रहवासी ने बताया प्रदूषण को लेकर उन्होंने संबंधित विभागों से सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी थी। जवाब में एक विभाग ने ध्वनि प्रदूषण सामान्य से अधिक होना बताया। जबकि दो भूमिगत प्रदूषण और पर्यावरण प्रदूषित होने के संबंध में गोलमाल जवाब दिया।
सुअर मर गए, कुत्ते त्वचा रोग से पीडि़त
फैक्टरियों में काम करने वालों ने बताया क्षेत्र में पहले अधिक संख्या में सुअर घूमते थे। नाले का प्रदूषित पानी पीने के कारण सुअर खत्म हो गए हैं। प्रदूषित पानी के कारण क्षेत्र के आवारा श्वान भी प्रभावित हैं। कुत्तों को त्वचा रोग हो गया है और बीमार बने रहते हैं।
चलाते नहीं है ट्रीटमेंट प्लांट
शासन के नियमों के अनुसार नाले में केमिकल वेस्ट छोडऩे से पहले उसे शुद्ध करना आवश्यक है। परंतु विषैला वेस्ट ही नाले में छोड़ा जा रहा है। औपचारिकता के लिए फैक्टरी संचालकों ने यूनिट में ट्रीटमेंट प्लांट भी लगा रखे हैं परंतु ये प्लांट दिखाने के लिए हैं।
वर्कशॉप में ठोकापीटी की आवाज से परेशान विद्यार्थी
कॉलोनी से सटी औद्योगिक क्षेत्र में टैंकर बनाने की वर्कशॉप है जहां दिनभर काम चलता है। कॉलोनी के 400 मकानों में से अधिकतर मकानों में प्रायमरी, मिडिल और हायर सेकंडरी में पढऩे वाले किशोर किशोरी हैं। वर्कशॉप से दिनभर ठोकापीटी की आवाज आती रहती है जिसके कारण उनकी पढ़ाई में व्यवधान होता है। बड़े बच्चे तो रात में पढ़ लेते हैं परंतु छोटे बच्चों को शोर-शराबे में ही पढऩा पड़ता है।









