जबलपुर में दिवाली पर सिर्फ 2 घंटे फोड़ सकेंगे पटाखे, इन जगहों पर रहेगा प्रतिबंध

जबलपुर। दिवाली पर पटाखे फोड़ने को लेकर जबलपुर प्रशासन ने सख्त नियम लागू किए हैं। कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा ने प्रतिबंधात्मक आदेश जारी करते हुए आतिशबाजी के लिए रात 8 बजे से 10 बजे तक का समय निर्धारित किया है। आदेश के अनुसार, 125 डेसिबल से अधिक आवाज वाले पटाखों पर प्रतिबंध रहेगा। साथ ही, केवल पर्यावरण अनुकूल ग्रीन पटाखे चलाने की अनुमति दी गई है। अस्पताल, नर्सिंग होम, न्यायालय और धार्मिक स्थलों के 100 मीटर के दायरे में पटाखे जलाने पर भी रोक रहेगी।
नकली ग्रीन पटाखे बेचने वालों पर कार्रवाई की मांग
पटाखों से होने वाले ध्वनि और पर्यावरण प्रदूषण को लेकर नागरिक उपभोक्ता एवं मार्गदर्शक मंच ने भी प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया है। कुछ दिन पहले मंच के डॉ. पीजी नाजपांडे ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर बाजार में बिक रहे तेज आवाज वाले पटाखों और ग्रीन पटाखों के नाम पर बेचे जा रहे नकली पटाखों की जानकारी दी थी।
मंच ने नकली ग्रीन पटाखों की बिक्री पर पूरी तरह रोक लगाने की मांग की थी। इसके साथ ही ज्ञापन में सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के निर्देशों का पालन सुनिश्चित कराने की अपील भी की गई थी।
दिवाली की रात देर तक होती है आतिशबाजी
दिवाली से एक-दो दिन पहले ही शहर में पटाखे फोड़ने का सिलसिला शुरू हो जाता है। त्योहार की रात भी कई लोग देर तक आतिशबाजी करते हैं। ऐसे में निर्धारित समय के बाद पटाखे फोड़ने और प्रतिबंधित पटाखों के इस्तेमाल को रोकना प्रशासन के लिए चुनौती बन जाता है।
तेज आवाज वाले पटाखों से ध्वनि प्रदूषण बढ़ता है, वहीं आतिशबाजी से निकलने वाला धुआं वायु गुणवत्ता को भी प्रभावित कर सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने पटाखे चलाने के समय, आवाज के स्तर और उनके प्रकार को लेकर प्रतिबंध लगाए हैं।
नियमों का पालन करने की अपील
प्रशासन के आदेश का उद्देश्य दिवाली के दौरान ध्वनि और वायु प्रदूषण को नियंत्रित करना तथा आम नागरिकों, मरीजों और आसपास के लोगों को तेज आवाज से होने वाली परेशानी से बचाना है। नागरिकों से निर्धारित समय के भीतर ही अनुमत पटाखे चलाने और प्रतिबंधित क्षेत्रों में आतिशबाजी नहीं करने की अपील की गई है।









