जिस अस्पताल में इलाज कराने पहुंचा, वहीं गई जान!

जबलपुर में इलाज के दौरान गई जान; संचालक के पास नहीं मिली चिकित्सा की वैध डिग्री, पुलिस ने दर्ज किया मामला
जबलपुर। मध्यप्रदेश के जबलपुर में इलाज के दौरान एक युवक की मौत के मामले में गंभीर लापरवाही के आरोप सामने आए हैं। बेलखाड़ू क्षेत्र के खैरी गांव स्थित अश्विनी अस्पताल में 33 वर्षीय शेखर चौधरी की मौत के बाद परिजनों ने एक्सपायरी डेट का ग्लूकोज और इंजेक्शन लगाने का आरोप लगाया है। मामले की जांच में यह भी सामने आया कि युवक का इलाज करने वाले सतीश साहू के पास चिकित्सा संबंधी कोई वैध डिग्री या डिप्लोमा नहीं था। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अस्पताल का निरीक्षण करने के बाद उसे सील कर दिया है। वहीं, कटंगी पुलिस ने आरोपी के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पेट दर्द की शिकायत पर अस्पताल पहुंचे थे शेखर
पुलिस के अनुसार, बेलखाड़ू के भट्टा मोहल्ला निवासी शेखर चौधरी को 2 अक्टूबर को अचानक पेट में तेज दर्द हुआ था। परिजन उन्हें इलाज के लिए खैरी गांव स्थित अश्विनी अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां सुबह तक उनका इलाज किया गया, जिसके बाद परिजन उन्हें घर ले आए।
कुछ देर बाद शेखर के हाथ-पैरों में तेज जलन होने लगी। परेशानी बढ़ने पर परिजन उन्हें दोबारा अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
ग्लूकोज चढ़ाने के आधे घंटे बाद मौत का आरोप
मृतक के भाई समीर चौधरी की शिकायत पर पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। जांच के दौरान सामने आया कि सतीश साहू ने शेखर के हाथ और कमर में इंजेक्शन लगाए थे। अगले दिन उन्हें फिर इंजेक्शन देने के साथ ग्लूकोज की ड्रिप चढ़ाई गई।
परिजनों का आरोप है कि ग्लूकोज की ड्रिप चढ़ाने के करीब आधे घंटे बाद शेखर की मौत हो गई। उन्होंने इलाज में एक्सपायरी डेट की दवाओं और ग्लूकोज के इस्तेमाल की आशंका जताई है। हालांकि, युवक की मौत का सटीक चिकित्सकीय कारण जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल किया सील
मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अश्विनी अस्पताल का निरीक्षण किया। जांच में इलाज करने वाले सतीश साहू के पास चिकित्सा संबंधी वैध डिग्री या डिप्लोमा नहीं होने की बात सामने आई। इसके बाद विभाग ने अस्पताल को सील कर दिया।
कटंगी पुलिस ने शनिवार को सतीश साहू के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है। पुलिस मामले से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है। युवक की मौत के लिए कथित चिकित्सकीय लापरवाही जिम्मेदार थी या नहीं, यह जांच और चिकित्सकीय निष्कर्षों के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।









