महाकाल लोक में सप्तऋषियों की वापसी का इंतजार, लाल पत्थर से तैयार हो रहीं प्रतिमाएं

अब सिर्फ एक प्रतिमा बनना बाकी
उज्जैन। महाकाल लोक आने वाले श्रद्धालुओं को जल्द ही भगवान सप्तऋषि की प्रतिमाएं नए और आकर्षक स्वरूप में देखने को मिलेंगी। हरिफाटक स्थित हाट बाजार में बंशी पहाड़पुर के लाल पत्थरों से सप्तऋषि की प्रतिमाओं का निर्माण किया जा रहा है। अब एक प्रतिमा का निर्माण शेष है। इसे पूरा करने में करीब दो माह का समय और लगेगा। प्रतिमाओं को ग्रंथों और पुराणों में वर्णित स्वरूप के अनुरूप तैयार किया जा रहा है।
इन प्रतिमाओं का निर्माण महाराजा विक्रमादित्य शोध पीठ द्वारा करवाया जा रहा है। ओडिशा के कोणार्क से आए शिल्पकार लाल पत्थरों को तराशकर प्रतिमाओं को आकार दे रहे हैं। इनका स्केच तैयार किया गया है। इसी स्केच के आधार पर सप्तऋषियों की प्रतिमाएं बनाई जा रही हैं।
छेनी-हथौड़ी से की जा रही बारीक नक्काशी
सप्तऋषियों की प्रतिमाओं की सबसे खास बात यह है कि इन पर नक्काशी किसी मशीन से नहीं, बल्कि पारंपरिक तरीके से छेनी और हथौड़ी की मदद से की जा रही है। प्रत्येक प्रतिमा को तराशने के लिए प्रतिदिन 8 से 10 कलाकार जुटे हुए हैं।
पहली प्रतिमा के बाद बदला ऊंचाई का निर्णय
प्रतिमाओं के निर्माण के दौरान ऊंचाई को लेकर बदलाव भी किया गया। पहली प्रतिमा तैयार होने के बाद उसकी ऊंचाई कम करने का निर्णय लिया गया। इसके बाद कम ऊंचाई वाली प्रतिमाओं का निर्माण शुरू किया गया। इसी प्रक्रिया के चलते फिलहाल आठ प्रतिमाएं तैयार हो चुकी हैं और एक प्रतिमा का काम बाकी है। वर्तमान में दो कलाकार ही मूर्तियां तराश रहे हैं।









