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सिंहस्थ क्षेत्र में 650 से ज्यादा अतिक्रमण इनमें से 155 अखाड़े-खालसे की जमीन पर

चुनौती : सिंहस्थ मेला आयोजन में दिक्कत दे सकते हैं 10 साल में हो गए क्षेत्र के स्थायी और अस्थायी निर्माण

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सूची अनुसार अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई जारी

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। सिंहस्थ-2028 में मेला क्षेत्र में हुए 650 से ज्यादा स्थायी-अस्थायी निर्माण प्रशासन के लिए दिक्कत बनकर खड़े हो गए हैं। इनमें भी 155 तो वह निर्माण हैं, जो अखाड़े और खालसे की जमीन पर हैं। ऐसे में इन्हें हटाना प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती हैं। दिलचस्प बात यह भी है कि महाकाल लोक बनने से इस बार तीन पीठ के तीन शंकराचार्य को जगह देने की परेशानी भी सामने खड़ी हो गई है।

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दरअसल, इस बार सिंहस्थ मेला करीब 3360 हेक्टेयर जमीन पर प्रस्तावित किया गया है। इसे फिलहाल चार जोन में बांटकर तैयारी की जा रही है। यह जोन महाकाल, दत्तअखाड़ा, मंगलनाथ और कालभैरव रहेंगे। पिछली बार सबसे ज्यादा महाकाल क्षेत्र भरा हुआ था। यहां आवंटित जमीन का 82 फीसदी उपयोग हुआ था, जबकि कालभैरव क्षेत्र में यह आंकड़ा केवल ७० फीसदी था। मंगलनाथ क्षेत्र में भी 75 फीसदी ही जमीन का उपयोग हुआ था। इस हिसाब से इस बार महाकाल क्षेत्र में दिक्कत ज्यादा बढऩे वाली है, क्योंकि इस क्षेत्र के सबसे बड़ा हिस्सा रुद्रसागर अब महाकाल लोक में आ गया है।

रुद्रसागर में पुरी के शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती, द्वारका-शारदा पीठ के शंकराचार्य दिवंगत स्वरूपानंद सरस्वती, दिवंगत लक्ष्मण चैतन्य ब्रह्मचारी के शिष्यों के कैंप लगते हैं। अब महाकाल लोक में रुद्रसागर के जाने से इनके कैंप लगाने का संकट खड़ा हो गया है। ऐसे में इन सभी को अलग जमीन दिखाने की तैयारी प्रशासन ने शुरू कर दी है। इसके लिए शंकराचार्यों से संपर्क साधा गया है। यह लोग जल्दी ही नई जगह देखने आ सकते हैं।

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द्वारका और शारदा पीठ के पहले एक ही शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती होते थे, अब दोनों पीठ के शंकराचार्य अलग-अलग हो गए हैं। द्वारका के शंकराचार्य सदानंद सरस्वती है तो शारदा पीठ के अविमुक्तेश्वरनंद सरस्वती। यह दोनों जमीन एक साथ चाहते हैं, हालंाकि कैंप दोनों के अलग-अलग होंगे।

सबसे बड़ी परेशानी अखाड़े खालसे की जमीनें

प्रशासन के सामने सबसे बड़ा सिरदर्द अखाड़े और खालसे की जमीन पर हो गए निर्माण हैं। करीब 155 निर्माण की पहचान की गई है। अखाड़े और खालसे सिंहस्थ में अपनी पुरानी जगह पर ही कैंप लगाते हैं और ऐसे में पुरानी भूमि नहीं मिलने पर वह बखेड़ा करने से भी नहीं चूकते।इन जमीनों को मुक्त कराना प्रशासन के लिए टेढ़ी खीर बन गया है।

समाधान अंडरस्टैंडिंग में
अखाड़े और खालसे की जमीन को मुक्त कराने के बजाय प्रशासन अंडरस्टैंडिंग में रास्ता तलाश रहा है। जहां-जहां अवैध निर्माण हैं, उनके मालिको से अंडरस्टैंडिंग ली जा रही है कि सिंहस्थ के दौरान वे जगह संबंधित अखाड़े या खालसे को दे देंगे। अब तक दस से ज्यादा लोगों ने अंडर स्टैंडिंग दे भी दी है।

साधु-संतों को पुरानी जगह खरीदने का ऑफर
साधु-संतों को पुरानी जगह खरीदने का ऑफर भी दिया जा रहा है। संत इस संबंध में संबंधितों से अपने स्तर पर संपर्क भी कर रहे हैं। चूंकि सिंहस्थ क्षेत्र में इस बार स्थायी बुनियादी निर्माण(सड़क, पानी, बिजली, सीवरेज) हो रहे हैं तो बड़े संत उज्जैन को तरजीह दे रहे हैं।

कहीं तो बस गई हैं कॉलोनियां
प्रशासन के सामने एक बड़ी चुनौती सिंहस्थ क्षेत्र में बन गईं कॉलोनियां भी हैं। गढ़कालिका, पीपलीनाका, आगर रोड पर ऐसी कई जमीनें हैं, जहां अब कॉलोनियां हैं। पहचान होने के बाद भी इन्हें हटाना सबसे बड़ी उलझन है, क्योंकि हटाने पर पब्लिक मूवमेंट खड़ा हो सकता है।

जोन प्रस्तावित क्षेत्रफल
कालभैरव 726.9
मंगलनाथ 843.6
दत्तअखाड़ा 1,392
महाकाल 397.85
कुल 3,360.6

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