नगर निगम के अपर आयुक्त सिंह मृत कर्मचारियों के घर संवेदना जताने पहुंचे

फूड वेस्ट टैंक हादसा: फिलहाल माधवनगर पुलिस ने होटल प्रबंधन पर दर्ज किया है प्रकरण
अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। श्रीगंगा ग्रुप का देवासरोड आउटलेट मंगलवार को फिर से शुरू हो गया। फूड वेस्टेज टैंक हादसे के कारण यह शनिवार रात से बंद था। हादसे में मृत नगरनिगम के कर्मचारियों के घर शोक संवेदना जताने नगरनिगम के अपर आयुक्त पवनकुमार सिंह पहुंचे। आयुक्त अभिलाष मिश्रा भी उनके घर जा सकते हैं। इधर, माधवनगर पुलिस ने हादसे का कारण लापरवाही को माना है और श्री गंगा प्रबंधन के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है।
देवासरोड आउटलेट में शनिवार रात दर्दनाक हादसा हुआ था। यहां फूड वेस्टेज टैंक की सफाई करने के दौरान सफाईकर्मी कमलेश तंबोली, नितिन,वाहिद और होटलकर्मी मनोज मीणा की टैंक में गिरने से मौत हो गई थी। शहर को झकझोरने वाले हादसे के बाद रविवार को श्री गंगा ग्रुप के चारों आउटलेट्स (देवासरोड , सी-२१ नानाखेड़ा, फ्रीगंज और श्री बेकर्स) रविवार को पूरे दिन बंद थे। सोमवार को देवासरोड को छोड़ बाकी आउटलेट्स चालू हो गए थे। मंगलवार सुबह देवासरोड का आउटलेट भी चालू हो गया। हालांकि यहां के कर्मचारियों के चेहरे पर हादसे की दहशत अभी भी देखी जा रही है। मृतकों के परिजनों को अभी किसी भी स्तर पर सहायता राशि नहीं मिली है।
शॉर्ट पीएम रिपोर्ट आई, प्रबंधन की लापरवाही मानी
सोमवार की दोपहर हादसे में जान गंवाने वालों की शॉर्ट पीएम रिपोर्ट सोमवार दोपहर आई। रिपोर्ट में मौत का कारण दम घुटना आया था। दम घुटने का कारण विषाक्त गैस बताया गया है। पुलिस ने इस आधार पर प्रबंधन के खिलाफ बीएनएस की धारा १०६ (१) में प्रकरण दर्ज कर लिया है। मर्ग की जांच शुरू हो गई है और यह जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, वैसे-वैसे आरोपी बढ़ते जाएंगे।
कमलेश के रिश्तेदार सचिन के बयान दर्ज
पुलिस ने कमलेश तंबोली के रिश्तेदार सचिन के बयान दर्ज कर लिए हैं। सचिन ने पुलिस को बयान दिया है कि टैंक सफाई के दौरान सुरक्षा उपकरण नहीं थे। अगर यह होते तो हादसे को टाला जा सकता है। पुलिस नितिन, वाहिद और मनोज के परिजनों के बयान भी दर्ज करेगी और इसके बाद जांच की दिशा तय होगी।
प्रबंधन का मतलब जांच के दायरे में सभी
एसपी प्रदीप शर्मा ने कहा कि प्रबंधन पर प्रकरण दर्ज होने का मतलब है कि जांच के दायरे में पूरा श्रीगंगा ग्रुप है। यह देखा जाएगा कि सफाई कराने के लिए कौन अधिकृत था। उसने अपने जिम्मेदारी ठीक से निभाई है या नहीं। अगर डायरेक्टर भी इस दायरे में आते हैं तो उन्हें भी आरोपी बनाया जा सकता है। पुलिस कानून के तहत काम कर रही है। किसी को भी ना तो बचाया जा रहा है, ना फंसाया जा रहा है, जो जिम्मेदार होगा, उस पर केस दर्ज होगा। चाहे वह कोई भी हो।









