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चिन्मय अमृत महोत्सव में अनोखा पल, स्वामी चिन्मयानंद के होलोग्राम से बोले पीएम मोदी

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ‘चिन्मय अमृत महोत्सव’ के समापन कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती के होलोग्राम से संवाद किया। यह तीन दिवसीय कार्यक्रम 23 से 25 अक्टूबर तक आयोजित किया जा रहा है, जिसमें देश-विदेश से 9 हजार से अधिक लोग भाग ले रहे हैं।

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पीएम मोदी को याद आई 1993 की मुलाकात

कार्यक्रम के दौरान स्वामी चिन्मयानंद के होलोग्राम ने प्रधानमंत्री मोदी से कहा कि उनकी पहली मुलाकात फरवरी 1993 में हुई थी। उस समय मोदी उन्हें शिकागो में आयोजित विश्व धर्म संसद के शताब्दी कार्यक्रम में आमंत्रित करने पहुंचे थे। इस पर प्रधानमंत्री ने कहा कि वह खुशनसीब हैं कि उन्हें एक बार फिर स्वामीजी के दर्शन का सौभाग्य मिला।

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1951 में हुई थी चिन्मय मिशन की स्थापना

स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती ने वर्ष 1951 में चिन्मय मिशन की स्थापना की थी। इसका मुख्य उद्देश्य भगवद्गीता, उपनिषद और वेदांत के ज्ञान को आम लोगों तक सरल तरीके से पहुंचाना है। मिशन के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर सालभर देश के विभिन्न हिस्सों में धार्मिक, आध्यात्मिक और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।

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मिशन का नेटवर्क भारत के कई राज्यों में फैला हुआ है। इसके अंतर्गत आश्रम, आध्यात्मिक अध्ययन केंद्र, सत्संग, बच्चों और युवाओं के लिए कार्यक्रम संचालित किए जाते हैं। इसके शैक्षणिक नेटवर्क में देशभर में 80 से अधिक चिन्मय विद्यालय और कई कॉलेज शामिल हैं।

दुनिया में 350 से ज्यादा केंद्र

चिन्मय मिशन की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, दुनिया भर में इसके 350 से अधिक केंद्र और 1,000 से ज्यादा आध्यात्मिक अध्ययन समूह हैं। मिशन शिक्षा और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में भी सक्रिय है।

गीता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने की पहल

चिन्मय अमृत महोत्सव के तहत पिछले वर्ष तमिलनाडु में संगीतकार इलैयाराजा के संगीत वाली तमिल भगवद्गीता जारी की गई थी। इसके अलावा, दुनिया भर के एक लाख से अधिक लोगों ने ऑनलाइन गीता के 15वें अध्याय का सामूहिक पाठ किया। ‘गीता पंचामृत’ जैसे कार्यक्रमों और युवाओं की देशव्यापी यात्राओं के माध्यम से भी गीता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया गया। महोत्सव का उद्देश्य भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं, गीता के ज्ञान और स्वामी चिन्मयानंद के विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है।

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