बढ़े किराये को लेकर ग्रामीण क्षेत्र में यात्रियों के विवाद शुरू

बस संचालकों ने भी माना कि किराया ज्यादा ही बढ़ा दिया
उज्जैन। राजपत्र में प्रकाशन के बाद बस संचालकों ने बढ़ा किराया यात्रियों ने लेना शुरू कर दिया है। शहरी क्षेत्र में तो विवाद नहीं हो रहे हैं लेकिन ग्रामीण रूट पर ड्राइवर-कंडक्टर की यात्रियों से बहस हो रही है। इनमें सबसे बड़ी परेशानी ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले मजदूरों को हो रही है, उन्हें बढ़ा किराया चुकाना भारी पड़ रहा है। हालांकि मजदूरी के लिए गांव से शहर तक बस से आना उनकी मजबूरी है। हालाकि बस संचालक भी मान रहे हैं कि किराया वृद्धि काफी कर दी गई है।
उज्जैन से बाहर जाने के सात मुख्य मार्ग हैं। इनमें इंदौर, देवास, बडऩगर, उन्हेल, आगर-मालवा, मक्सी, कानीपुरा मुख्य मार्ग हैं। इनमें से देवास और इंदौर को शहरी और बाकी पांच की गिनती ग्रामीण रूट में होती है। सात मार्ग पर करीब 400 बसें रोजाना चलती हैं और प्रतिदिन 30 से 35 हजार लोग यात्रा करते हैं। उज्जैन से कई लोग नौकरी, व्यवसाय और पढ़ाई के लिए इंदौर जाते हैं। उज्जैन में इस रूट पर रोजाना 150 बसें चलती हैं जो अन्य रूट की तुलना में सबसे ज्यादा हैं। साधारण बस में उज्जैन से इंदौर का किराया 75 रुपए से बढ़कर 112 रुपए हो गया है। जबकि चार्टर्ड में यह 110 से बढ़कर 150 रुपए हो गया है। हालांकि इस रूट पर बस संचालक साधारण श्रेणी की बसों में 100 रुपए ही किराया ले रहे हैं।
किस रूट पर कितनी बसें: जानकारी के अनुसार उज्जैन से इंदौर रूट पर 150, उज्जैन से आगर रूट पर 100, देवास रूट पर 70, बडऩगर रूट पर 50, उन्हेल रूट पर 15, महिदपुर रतलाम रूट पर 10-10 और देपालपुर रूट पर 5 बसें चलती है। तराना रूट पर भी बसों की संख्या 30 के करीब है। बस संचालकों की संख्या करीब 50 है और दो हजार से अधिक लोगों को इससे रोजगार मिलता है।
उज्जैन से इन शहरों तक बस का किराया
| स्थान | किराया (₹) |
|---|---|
| इंदौर | 112 |
| सांवेर | 75 |
| महिदपुर | 120 |
| धार | 220 |
| बड़नगर | 100 |
| बदनावर | 120 |
| कानवन नागदा | 150 |
| रतलाम | 200 |
| रावटी | 240 |
| बाजना | 275 |
| जावरा | 200 |
| नागदा | 100 |
| मंदसौर | 300 |
| नीमच | 400 |
| झाबुआ | 250 |
| भैसोला | 150 |
| शाजापुर | 130 |
| ब्यावरा | 300 |
| पचोर | 280 |
| सारंगपुर | 240 |
| नलखेड़ा | 200 |
| आगर | 140 |









