सुविधा : एयरक्राफ्ट जैसे सफर का अहसास कराएगी वंदेभारत स्लीपर

इंडो-रूसी तकनीक से लैस वंदे भारत स्लीपर के पहले प्रोटोटाइप का परीक्षण दिसंबर में
नईदिल्ली, एजेंसी। भारत में रेलयात्री अगले साल अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रीमियम वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में सफर कर सकेंगे। यह ट्रेन यात्रियों को किसी ‘एयरक्राफ्ट- लग्जरी’ का अहसास कराएगी। भारतीय-रूसी संयुक्त उद्यम काइनेट रेलवे सॉल्यूशंस के तहत तैयार हो रही ट्रेन का पहला प्रोटोटाइप दिसंबर में भारतीय पटरियों पर परीक्षण के लिए उतार दिया जाएगा।
सभी तकनीकी जांच और सुरक्षा मानकों पर कसने के बाद रेल यात्रियों के लिए इन्हें संचालित किया जाएगा। इस अंतरराष्ट्रीय सहयोग से भारत में वैश्विक आपूर्ति शृंखला और रोबोटिक मैन्युफैक्चरिंग का मजबूत ढांचा भी तैयार होगा।
रेलवे बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि भारतीय रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) और रूस की दिग्गज रोलिंग-स्टॉक निर्माता ट्रांसमाशहोल्डिंग (टीएमएच) के इस संयुक्त उद्यम के तहत कुल 1,920 कोच (120 वंदे भारत स्लीपर) ट्रेनसेट का निर्माण किया जाएगा।
इस मेगा प्रोजेक्ट की कुल लागत लगभग 14,400 करोड़ है, जिसके तहत अगले 35 वर्षों तक इन ट्रेनों के विश्वस्तरीय रखरखाव का जिम्मा भी काइनेट संयुक्त उद्यम के पास ही रहेगा। उन्होंने बताया कि प्रोटोटाइप के लिए आरडीएसओ द्वारा तकनीकी व अन्य सुरक्षा मानकों पर कठोर ट्रायल रन किए जाएंगे। ट्रेन की परीक्षण रफ्तार 110 से 180 किलोमीटर प्रति घंटे रहेगी।
लातूर में तैयार 16 कोच
महाराष्ट्र स्थित मराठवाड़ा रेल कोच फैक्टरी को आधुनिक असेंबली लाइनों और अत्याधुनिक टेस्टिंग ट्रैक्स के अनुसार तेजी से अपग्रेड किया जा रहा है। लातूर कोच फैक्टरी से पहला 16-कोच वाला प्रोटोटाइप तैयार होने के बाद रेलवे को देंगे।
अत्याधुनिक सुविधाएं
यह ट्रेन यात्रियों को किसी ‘एयरक्राफ्ट-स्टाइल लग्जरीÓ का अहसास कराएगी। इसमें यूरोपियन टच-स्क्रीन केबिन कंट्रोल, प्रीमियम साउंड-प्रूफिंग नॉइज इन्सुलेशन, हॉट-वॉटर शावर (एसी-1) और अधिक प्राइवेसी वाले केबिन डिजाइन किए गए हैं। स्वचालित दरवाजे, एम्बिएंट लाइटिंग, बायो-वैक्यूम टॉयलेट और आधुनिक जीपीएस आधारित यात्री सूचना प्रणाली इसे बेहद खास बनाती है।
मिलेगी नई ऊंचाई
भारतीय-रूसी तकनीक का यह संगम भारतीय रेलवे के भविष्य को एक नई ऊंचाई देने वाला है। ट्रांस-साइबेरियन ट्रेनों के निर्माण का व्यापक अनुभव रखने वाली रूसी कंपनी टीएमएच की ‘हाई-ड्यूरेबिलिटी बोगी तकनीक’ भारतीय पटरियों पर 160 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार पर भी बेहद शांत जैसा अनुभव मिलेगा।









