ओणम संध्या में दिखी केरल की पंरपरा, अयप्पा स्वामी मंदिर में जुटा समाज

फूलों की पुक्कलम से सजी मंदिर परिसर की रंगत
सुमित कुमार उज्जैन। अयप्पा स्वामी मंदिर में रविवार को ओणम का उल्लास छाया रहा। केरल का यह पर्व यूं तो इसी महीने के पहले सप्ताह में हो गया था, पर मलयाली परिवार ने अपनी सुविधा अनुसार इसे रविवार को मनाया। मंगल कॉलोनी स्थित अयप्पा मंदिर में केरल के खान-पान और सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिली। समाज के लोगों ने समारोह आयोजित किया और दिनभर उल्लास से पर्व मनाया गया। इस दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए, खेल खेले गए और अंत में ओणम संध्या हुआ।
1988 में रखी थी मंदिर की आधारशिला
शबरीमला श्री अयप्पा स्वामी मंदिर की आधारशिला 1988 में रखी गई थी। आयोजन से जुड़े लोगों के अनुसार मंदिर करीब 38 साल पुराना है। मंदिर की परंपरा में गर्भगृह में प्रवेश को लेकर भी विशेष नियम हैं। पारंपरिक केरली मंदिर व्यवस्था के अनुसार मुख्य मंदिर अथवा गर्भगृह में केवल पुजारी के ही प्रवेश करने की परंपरा है। आम श्रद्धालुओं गर्भगृह के बाहर से ही दर्शन कर सकते हैं।
केरल में मुख्य रुप से 26 प्रकार के व्यंजन बनते है, यहां पर बने १२
ओणम समारोह का प्रमुख आकर्षण ‘ओणम संध्या’ रहा। ओणम के अवसर पर तैयार होने वाले इस पारंपरिक भोज में पूरी तरह शाकाहारी भोजन परोसा गया। भोजन में नारियल का विशेष उपयोग हुआ। नारियल तेल से लेकर नारियल की गीरी उपयोग की गई। आयोजन से जुड़े लोगों के अनुसार केरल में पारंपरिक रूप से संध्या में 26 से 30 प्रकार के व्यंजन परोसे जाते हैं। उज्जैन के आयोजन में इनमें से करीब 12 प्रकार के व्यंजन तैयार किए गए। इसके साथ पायसम (खीर)भी बनाई गई। केरल में अलग-अलग अवसरों पर कई तरह से पायसम तैयार किए जाते हैं। यहां पिछले साल दो प्रकार के पायसम बनाए गए थे, जबकि इस साल एक ही प्रकार का पायसम तैयार किया गया।
फूलों की रंगोली बनी आकर्षण
ओणम की सजावट में भी पारंपरिकता दिखाई दी। सामान्य पाउडर या केमिकल रंगोली के स्थान पर ताजे फूलों से पुक्कलम तैयार किया गया। फूलों की सजावट ने पूरे आयोजन स्थल को पारंपरिक स्वरूप दिया। संस्था के विनय नायर ने बताया कि दक्षिण भारत में घरों के बाहर रोजाना चावल के आटे से रंगोली बनाने की परंपरा है, लेकिन ओणम के अवसर पर विशेष रूप से ताजे फूलों का इस्तेमाल कर पुक्कलम सजाया जाता है। ओणम समारोह की तैयारियों में समाज के करीब 30 से 35 सदस्य, महिलाएं और परिवार शामिल रहे। ओणम संध्या के पहले दोपहर करीब 2 बजे से ही सब्जियों की विशेष कटाई और भोजन से जुड़ी तैयारियां शुरू कर दी गई थीं। सामूहिक सहभागिता के साथ पारंपरिक भोजन तैयार किया गया।
इस बीच बच्चों के डांस और महिला सदस्यों की प्रस्तुतियों सहित करीब 12 से 15 सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए। नई पीढ़ी को भी केरल की परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से जोडऩे का प्रयास दिखाई दिया।
खास प्रकार के व्यंजनों से सजी केले के पत्ते की थाल
कार्यक्रम का आकर्षण व्यंजनों को परोसने का तरीका था। केले के पत्तो पर भोजन परोसा गया। खाने में मुख्य रुप से कुत्तअरी चावल, सांभर, कूट करी,कालन, ओलन, अवियल, परिप्प प्रदमन (स्पेशल पायसम), रसम, शर्करा उप्पेरी, पप्पडम के साथ ही आम का आचार और केले की चिप्स भी शामिल थे।









