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Maa Behan Review: ओवरएक्टिंग और कमजोर कहानी का बोझ नहीं संभाल पाई माधुरी दीक्षित की फिल्म

पिछले कुछ दिनों से माधुरी दीक्षित, तृप्ति डिमरी और रवि किशन अभिनीत फिल्म ‘मां बहन’ को लेकर काफी चर्चा थी। प्रचार सामग्री और झलकियों को देखकर उम्मीद की जा रही थी कि दर्शकों को एक मजबूत और प्रभावशाली कहानी देखने को मिलेगी। हालांकि, फिल्म देखने के बाद यह उम्मीद काफी हद तक अधूरी नजर आती है। कहानी, निर्देशन और अभिनय के स्तर पर फिल्म कई जगह कमजोर पड़ती दिखाई देती है।

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क्या है फिल्म की कहानी?

यह कहानी एक मां और उसकी दो बेटियों के इर्द-गिर्द घूमती है, जिनमें से एक की भूमिका तृप्ति डिमरी ने निभाई है। फिल्म की शुरुआत रहस्य और सनसनी के माहौल के साथ होती है। एक दिन मां अपनी बेटियों को फोन कर बुलाती है और बताती है कि उससे एक हत्या हो गई है। यहीं से कहानी का मुख्य घटनाक्रम शुरू होता है।

शुरुआत में कहानी दर्शकों की उत्सुकता जगाती है, लेकिन आगे बढ़ने के साथ कथानक अपनी दिशा खोता हुआ दिखाई देता है। कई घटनाएं और पात्र ऐसे लगते हैं जिनका उद्देश्य स्पष्ट नहीं हो पाता। परिणामस्वरूप दर्शक यह समझने में उलझे रहते हैं कि कहानी आखिर किस दिशा में जा रही है।

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अभिनय कैसा है?

फिल्म में कई अनुभवी कलाकार मौजूद हैं, लेकिन अधिकांश पात्रों का प्रस्तुतिकरण अत्यधिक नाटकीय महसूस होता है। तृप्ति डिमरी कुछ दृश्यों में प्रभाव छोड़ती हैं और उनके संवाद बोलने का अंदाज भी प्रभावित करता है। हालांकि, कई मौकों पर अभिनय जरूरत से ज्यादा ऊंचे स्वर और अतिनाटकीय शैली में बदल जाता है।

माधुरी दीक्षित जैसी अनुभवी अभिनेत्री से दर्शकों की अपेक्षाएं स्वाभाविक रूप से अधिक रहती हैं, लेकिन इस फिल्म में उनका किरदार और प्रस्तुति पूरी क्षमता का उपयोग करती नजर नहीं आती। अन्य कलाकारों के अभिनय में भी कई स्थानों पर संयम की कमी दिखाई देती है।

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निर्देशन रहा कमजोर कड़ी

निर्देशक सुरेश त्रिवेणी इससे पहले कई सराही गई फिल्मों और परियोजनाओं का हिस्सा रह चुके हैं। लेकिन इस फिल्म में उनका निर्देशन अपेक्षित प्रभाव नहीं छोड़ पाता। कहानी की गति असंतुलित लगती है और कई दृश्य अनावश्यक रूप से खींचे गए प्रतीत होते हैं। फिल्म का भावनात्मक और रहस्यपूर्ण पक्ष भी पूरी तरह विकसित नहीं हो पाता।

फिल्म का अंतिम मूल्यांकन

‘मां बहन’ एक ऐसी फिल्म है जो रोचक विचार के साथ शुरू होती है, लेकिन पटकथा और निर्देशन की कमजोरियों के कारण अपनी संभावनाओं का पूरा लाभ नहीं उठा पाती। कुछ कलाकारों के अच्छे प्रयासों के बावजूद फिल्म समग्र रूप से प्रभाव छोड़ने में सफल नहीं होती।

यदि आप केवल जिज्ञासा के कारण या कलाकारों के प्रशंसक होने के नाते इसे देखना चाहते हैं तो देख सकते हैं, लेकिन एक मजबूत कहानी और संतुलित प्रस्तुति की अपेक्षा रखने वाले दर्शकों को यह फिल्म निराश कर सकती है।

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