नगर पूजा 11 को, मां महामाया और महालया को लगेगा मदिरा का भोग

27 किलोमीटर तक बहेगी मदिरा की धार, कलेक्टर करेंगे पूजन

उज्जैन। शारदीय नवरात्रि की महाष्टमी पर 11 अक्टूबर को चौबीस खंभा माता मंदिर में नगर पूजा की जाएगी। कलेक्टर नीरज कुमार सिंह सुबह 8 बजे मां महामाया और मां महालया को मदिरा का भोग लगाकर पूजन की शुरुआत करेंगे। इसके बाद अधिकारी एवं कोटवारों का दल ढोल-ढमाकों के साथ 27 किलोमीटर की परिधि में आने वाले देवी और भैरव मंदिरों में पूजन के लिए रवाना होंगे। इस दौरान हांडी से मदिरा की धार बहाई जाएगी। दरअसल, हांडी में छेद होता है इसी के जरिए निरंतर धार बहती रहती है।
सम्राट विक्रमादित्य के काल से चल रही परंपरा
शारदीय नवरात्र की महाष्टमी पर नगर पूजा की परंपरा सम्राट विक्रमादित्य के काल से चली आ रही है। कालांतर में रियासतों के समय भी पूजन की परंपरा का निर्वहन किया जाता रहा। आजादी के बाद से शासन द्वारा नगर पूजा करवाई जा रही है।
श्रद्धालु ग्रहण करते हैं मदिरा का प्रसाद
श्री चौबीस खंभा माता मंदिर में पूजन के पश्चात मदिरा को एक पात्र में एकत्र कर वितरित किया जाता है। श्रद्धालु भी इसे मां के प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। माना जाता है कि इस प्रसाद को ग्रहण करने से सभी तरह की व्याधियां दूर होती हैं।
महाष्टमी दोपहर 12.07 बजे तक
ज्योतिषाचार्य पं. अमर डिब्बेवाला ने बताया कि 11अक्टूबर को महाष्टमी दोपहर 12.7 बजे तक रहेगी। इसके बाद नवमी तिथि लग जाएगी जो 12 अक्टूबर को सुबह 11 बजे तक रहेगी। इसके बाद विजयादशमी पर्व मनेगा।
दशहरा पर नए शहर आएगी भगवान महाकाल की सवारी
वर्ष में एक बार विजयादशमी पर भगवान महाकाल की सवारी का नए शहर में आगमन होता है। इस वर्ष 12 अक्टूबर शाम ४ बजे श्री महाकालेश्वर मंदिर से बाबा महाकाल की सवारी निकलेगी। चांदी की पालकी में भगवान महाकाल विराजित होकर विभिन्न मा से होकर दशहरा मैदान पहुंचेंगे। शमी पूजन के बाद सवारी वापस महाकाल मंदिर लौट जाएगी।
दशहरा पर्व पर वर्ष में एक बार भगवान महाकाल नए शहर में भी प्रजा को दर्शन देने के लिए चांदी की पालकी में सवार होकर आते है। 12 अक्टूबर को मंदिर के सभा मंडप में पूजन-अर्चन के बाद सवारी दशहरा मैदान के लिए रवाना होगी। मंदिर परिसर के बाहर सशस्त्र पुलिस बल के जवान राजाधिराज महाकाल को सलामी देगें।
सवारी के साथ पुलिस बैंड, पुलिस घुड़सवार दल, सशस्त्र पुलिस के जवान, मंदिर के पंडे-पुजारी, अधिकारी-कर्मचारी व भक्त रहेंगे। हालांकि इस बार संभव है कि राजसी स्वरूप में सवारी निकालने के लिए चुनिंदा भजन मंडलियों को भी शामिल किया जाए। सवारी शहर के विभिन्न मार्गों से होकर दशहरा मैदान पहुंचेगी। रावण दहन के पूर्व दशहरा मैदान पर बाबा महाकाल का विधि-विधान से पूजन के बाद शमी वृक्ष का पूजन होगा। दशहरा मैदान पर पूजन की व्यवस्था मंदिर समिति द्वारा ही की जाती है।









