अधीक्षकों को 400 किमी दूर भेजने की तैयारी!

7 साल से एक ही संस्थान में पदस्थ कर्मचारियों के तबादले का मामला गरमाया
विरोध में भोपाल कूच की चेतावनी
अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। जनजातीय कार्य विभाग और अनुसूचित जाति कल्याण विभाग के छात्रावासों, आश्रम शालाओं और आवासीय विद्यालयों में पदस्थ अधीक्षकों के तबादले का मामला तूल पकडऩे लगा है। उज्जैन में वर्षों से सेवाएं दे रहे कई कर्मचारियों को 300 से 400 किलोमीटर दूर दूसरे जिलों या संभागों में भेजे जाने की आशंका है। इसके विरोध में कर्मचारियों ने मोर्चा खोल दिया है। उनका कहना है कि मांगें नहीं मानी गईं तो प्रदेशभर के अधीक्षक एकजुट होकर भोपाल में बड़ा आंदोलन करेंगे।
अधीक्षक संघ के सदस्य मुकेश कुमार यादव के अनुसार, उज्जैन में काम कर रहे कई कर्मचारी वर्ष 2018-19 और 2019-20 से एक ही स्थान पर पदस्थ हैं। इनमें ऐसे कर्मचारी भी हैं जिनके परिवार में बुजुर्ग माता-पिता और छोटे बच्चे हैं। कर्मचारियों का तर्क है कि अचानक दूसरे जिलों में तबादला होने से बच्चों की पढ़ाई, परिवार की देखभाल और आर्थिक स्थिति पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।
तबादले की प्रक्रिया निरस्त करने की मांग- कर्मचारियों ने उज्जैन जैसे गैर-जनजातीय जिले में इस व्यवस्था को लागू करने के तरीके पर पुनर्विचार करने की मांग की है। तबादले के विरोध में रविवार को दोपहर करीब दो बजे अधीक्षक और शिक्षक सांसद कार्यालय तथा मुख्यमंत्री कार्यालय पहुंचे। यहां ज्ञापन सौंपकर वर्तमान पदस्थापना बनाए रखने और तबादले की प्रक्रिया निरस्त करने की मांग की गई। कर्मचारियों का कहना है कि वर्षों से एक ही संस्थान में सेवाएं देने वाले अधीक्षकों के मामले में स्थानीय परिस्थितियों, पारिवारिक जिम्मेदारियों और व्यावहारिक कठिनाइयों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
30 सितंबर के आदेश से बढ़ी हलचल
आयुक्त, जनजातीय कार्य विभाग, भोपाल की ओर से 30 सितंबर को जारी आदेश में एक ही संस्था में सात साल से अधिक समय से पदस्थ अधीक्षक-अधीक्षिकाओं को स्थानांतरित करने के निर्देश दिए गए थे। इसके तहत कर्मचारियों को 5 से 7 अक्टूबर तक ई पोर्टल पर अनिवार्य रूप से स्थानांतरण के लिए आवेदन करना था। आदेश में अधिकतम 15 पदस्थापनाओं के विकल्प देने की व्यवस्था भी थी। आवेदन नहीं करने की स्थिति में विभाग द्वारा नियमानुसार स्वयं स्थानांतरण किए जाने का प्रावधान बताया गया है।









