पुलिस ने विपक्ष का मार्च रोका राहुल-प्रियंका हिरासत में

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को लेकर 19 दलों का प्रदर्शन
नईदिल्ली, एजेंसी। राहुल गांधी समेत 19 दलों के विपक्षी सांसद दिल्ली में चुनाव आयोग तक मार्च निकाल रहे हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर 19 विपक्षी पार्टियों के सांसद सेव डेमोक्रेसी मार्च निकाल रहे हैं। पुलिस ने ऑल इंडिया रेडियो के बाहर विपक्षी सांसदों को आगे बढऩे से रोक दिया है। राहुल गांधी हाथ में तिरंगा लेकर और प्रियंका गांधी बैरिकेड्स पर चढ़ गए। पुलिस ने राहुल-प्रियंका को हिरासत में लिया है।
सांसद सेव डेमोक्रेसी का बैनर लेकर पहुंचे। ‘ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दो’ के नारे लगाए। ज्ञानेश कुमार के खिलाफ देश में पिछले पांच दिनों से प्रदर्शन हो रहा है। राहुल जेन-जी से कनेक्ट के लिए प्रदर्शन में ‘ज्ञानेश, इट्स डन ब्रो’ का पोस्टर लेकर पहुंचे थे। उनका मकसद इस वर्ग को सीधे मैसेज देना था। देश में आज हर चौथा वोटर जेन-जी है। चुनाव आयोग के मुताबिक, लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान देश के कुल मतदाताओं में 18-29 साल के वोटरों की हिस्सेदारी 22.78 प्रतिशत थी। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े ने आरोप लगाया था कि एसआईआर से 13 करोड़ नाम काटे गए हैं। इससे पहले इंडिया गठबंधन ने 11 अगस्त 2025 को भी मार्च निकाला था।
ज्ञानेश कुमार को पद से हटना पड़ेगा
कांग्रेस नेता उदित राज ने कहा कि ज्ञानेश कुमार को पद से हटना ही पड़ेगा, आज नहीं तो कल उन्हें जाना ही होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि जब वे सत्ता या पद पर नहीं रहेंगे, तब करोड़ों लोगों के वोट का अधिकार कथित तौर पर छीनने के अपराध की सजा उन्हें भुगतनी पड़ेगी। इस तरह से बनाई गई सरकारें पूरी तरह गैरकानूनी हैं।
भाजपा के लिए काम कर रहा आयोग
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि चुनाव आयोग को लेकर शिकायतें और आपत्तियां नई नहीं हैं और पहले भी इसकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठते रहे हैं। चुनाव आयोग भाजपा के लिए काम कर रहा है। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग का रवैया ऐसा दिखता है जैसे केवल बीजेपी के सदस्य ही भारतीय नागरिक हैं और उन्हीं को वोट देने का अधिकार है।
ज्ञानेश कुमार के निलंबन से अदालत का इनकार
नईदिल्ली, एजेंसी। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान कथित तौर पर कानून की अनदेखी कर फैसले लेने के आरोप में मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने या उनके फैसले लेने पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि कानून के अनुरूप नहीं पाए गए फैसलों को रद्द किया जा सकता है। सीजेआई सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने कहा कि कोई आदेश पारित करने से पहले केंद्र, निर्वाचन आयोग और अन्य संबंधित पक्षों का जवाब सुनना जरूरी है। सीजेआई ने कहा कि इस संबंध में एक अनिवार्य कानून है और अदालत उम्मीद करती है कि निर्वाचन आयोग उसका पालन करेगा।









