कैंसर की दवाओं पर मुनाफे की सीमा तय, बाकी दवाओं की कीमतों पर नियंत्रण क्यों नहीं?

सुप्रीम कोर्ट ने मुनाफा सीमित करने के केंद्र के फैसले पर सवाल उठाए
नईदिल्ली, एजेंसी। सुप्रीम कोर्ट ने कैंसर की दवाओं पर मुनाफा 30त्न तक सीमित करने के केंद्र के फैसले पर सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि सरकार के जवाब में खुश होने जैसा कुछ नहीं है। कोर्ट ने पूछा कि जब कैंसर की दवाओं पर मार्जिन तय किया जा सकता है, तो दूसरी दवाइयों की कीमत पर कंट्रोल क्यों नहीं होता।
केंद्र ने बताया कि कैंसर दवाओं पर मुनाफे की सीमा तय करने से मरीजों को सालाना करीब 2,500 करोड़ रुपए की बचत होने की उम्मीद है। कोर्ट ने दवाओं की कीमत तय करने के तरीके पर जानकारी देने के लिए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को 27 अक्टूबर तक का समय दिया। सरकार के फार्मास्यूटिकल्स विभाग की 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, 2024-25 में भारत में कैंसर-रोधी दवाओं की सालाना बिक्री 5,281 करोड़ रही। 2021-22 में यह 3,382 करोड़ थी। यानी तीन साल में बिक्री करीब 56त्न बढ़ी।
मरीजों तक पहुंचाना सरकार की जिम्मेदारी
केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी पेश हुए। बेंच ने सवाल किया कि जब परिवहन, रिसर्च और अन्य खर्च एमआरपी में शामिल हैं, तो दवाएं असली लागत से 400 गुना ज्यादा कीमत पर बेचने की अनुमति क्यों है? भाटी ने कहा कि भारत में दवाएं दुनिया में सबसे सस्ती हैं, इसलिए विदेश से भी लोग इलाज कराने आते हैं।









