RBI ने बढ़ाया रेपो रेट, महंगा हो सकता है लोन

रेपो रेट 5.25% से बढ़कर 5.50%, फरवरी 2023 के बाद पहली बार हुई बढ़ोतरी
नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने ब्याज दरों को लेकर बड़ा फैसला लेते हुए रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की है। इसके बाद रेपो रेट 5.25% से बढ़कर 5.50% हो गई है। यह फरवरी 2023 के बाद पहली बार है, जब RBI ने रेपो रेट बढ़ाई है।
RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय बैठक के बाद बुधवार, 7 अक्टूबर को गवर्नर संजय मल्होत्रा ने फैसले की जानकारी दी। बढ़ोतरी का असर आने वाले समय में होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की ब्याज दरों पर पड़ सकता है। हालांकि इसका वास्तविक असर बैंकों की ओर से दरों में किए जाने वाले बदलाव पर निर्भर करेगा।
क्यों बढ़ाई गई रेपो रेट?
रेपो रेट वह दर है जिस पर RBI बैंकों को कर्ज देता है। इसमें बढ़ोतरी होने पर बैंकों के लिए RBI से पैसा लेना महंगा हो जाता है। इसका असर बैंक ग्राहकों तक पहुंच सकता है और नए कर्ज की ब्याज दरों में बढ़ोतरी के साथ EMI भी बढ़ सकती है।
RBI ने यह फैसला बढ़ती महंगाई और वैश्विक स्तर पर बढ़े लागत दबाव के बीच लिया है। खास तौर पर कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और खाद्य महंगाई को लेकर चिंता बढ़ी है।
महंगाई का अनुमान 5.2% किया
RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए महंगाई का अनुमान 5.0% से बढ़ाकर 5.2% कर दिया है। वहीं, अर्थव्यवस्था को लेकर RBI का रुख सकारात्मक रहा है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान 6.7% से बढ़ाकर 7.1% किया गया है।
लोन लेने वालों पर क्या असर?
रेपो रेट बढ़ने के बाद जिन ग्राहकों के लोन की ब्याज दरें रेपो से जुड़ी हैं, उनकी EMI या लोन की अवधि पर असर पड़ सकता है। नए होम लोन, वाहन ऋण और व्यक्तिगत ऋण लेने वालों के लिए भी ब्याज दरें बढ़ने की संभावना रहेगी। वहीं, बैंक जमा और FD की ब्याज दरों में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।
RBI के इस फैसले से साफ है कि महंगाई पर नियंत्रण और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाए रखना फिलहाल मौद्रिक नीति की बड़ी प्राथमिकता है।









