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सावन में उज्जैन नहीं आ पाए, विदेश में घर बैठे कर रहे रुद्राभिषेक

मंदिरों में चल रही ऑनलाइन पूजन; काल सर्प पूजन, गृह-ग्रहण शांति ज्यादा करा रहे श्रद्धालु

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। धार्मिक नगरी उज्जैन में भी ऑनलाइन पूजन का ट्रैंड तेजी से बढ़ा है। हर प्रमुख मंदिर पर वीडियो कॉल के माध्यम से विभिन्न पूजाएं चल रही है। यजमान देश-विदेश में कहीं भी बैठा है और उसकी ओर से पूजन उज्जैन में चल रहा है।
रविवार को विष्णु सागर स्थित श्री मार्कण्डयेश्वर महादेव मंदिर पर ऑनलाइन पूजन-दर्शन का क्रम चल रहा था। 84 महादेव में 36वें श्री मार्कण्डयेश्वर महादेव पर पूजन से आयु वृद्धि होती है, ऐसा स्कंद पुराण मेें वर्णित है।

पढ़े-लिखे युवा ब्राह्मणों ने शुरू किया हाईटैक पूजन का ट्रेंड
श्री मार्कण्डयेश्वर महादेव पर ऑनलाइन दर्शन करा रहे युवा पं. दीप मेहता मेकेनिकल इंजीनियर हैं। कोविड के बाद इन्होंने यहां टैक्नोलॉजी का उपयोग कर पूजन व्यवस्था को आधुनिक किया। पं. मेहता बताते हैं कि वे उनके यजमान और मंदिर से जुड़े भक्तों को प्रतिदिन वीडियो के जरिए ऑनलाइन पूजन व शृंगार दर्शन कराते हैं। जन्मदिन पर श्री मार्कण्डयेश्वर महादेव के पूजन का विशेष महत्व है। इसके लिए दूर-दूर बैठे लोग यहां ऑनलाइन के माध्यम से पूजन कराते हैं और दर्शन करते हैं।

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कोरोना के बाद से बढ़ा ऑनलाइन पूजन
पुजारी पं. पवन शर्मा ने बताया कि ऑनलाइन पूजन का ट्रेंड कोरोनाकाल के बाद से बढ़ा है। दूर बैठे यजमान यहां महामृत्युंजय मंत्र जाप, कालसर्प पूजन, गृह व ग्रहण शांति पूजन के लिए ज्यादा यजमान आते हैं। सावन में रूद्राभिषेक हो रहे हैं। पं. शर्मा बताते हैं सावन के इन १० दिनों में वे करीब 30 ऑनलाइन पूजन करा चुके हैं। ये अमेरिका के अलावा गुजरात के वडोदरा, सूरत, अहमदाबाद, बैंगलुरु, इंदौर आदि शहरों के श्रद्धालु हैं।

पूजा का फल मिलता है या नहीं
कई लोगों के मन में सवाल होता है कि ऑनलाइन पूजन का फल मिलता है या नहीं। पं. शर्मा का कहना है कि संकल्प और अंत में हवन के बाद पूजन का फल मिलता है। शेष कर्म ब्राह्मण को करना है। ऑनलाइन पूजन में वीडियो कॉल के माध्यम से यजमान को संकल्प कराते हैं। समापन पर जिस पूजा में हवन जरूरी है वो भी वीडियो कॉल के माध्यम से कराते हैं। मंदिर और यजमान के निवास पर अलग-अलग यज्ञ होता है। वीडियो कॉल के जरिए उज्जैन में बैठे ब्राह्मणजन मंत्रोच्चार कर खुद भी आहूति देते हैं और यजमान से भी कराते हैं। इस पूजा के फल में कोई संशय नहीं है।

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