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साधु-संतों ने किया कान्ह डायवर्शन क्लोज डक्ट परियोजना का निरीक्षण

अधिकारियों से पूछा कैसे नदी के पानी को मोडक़र आगे भेजेंगे

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। कान्ह के दूषित पानी को शिप्रा में मिलने से रोकने के लिए बनाई जा रही कान्ह डायवर्शन क्लोज डक्ट परियोजना के कार्यों की प्रगति देखने के लिए मंगलवार को स्थानीय अखाड़ा परिषद के साधु-संत कार्यस्थल पहुंचे। उन्होंने देखा कि मोक्षदायिनी शिप्रा के पानी को शुद्ध करने के लिए जो परियोजना बनाई है उसमें कितना काम हुआ। उन्होंने कामों का अवलोकन किया और अधिकारियों से जानकारी ली कि किस तरह नदी के पानी को मोडक़र आगे भेजा जाएगा।

दरअसल, शहर में सिंहस्थ 2028 की तैयारियां भी शुरू हो चुकी हैं। इसी सिलसिले में 13 अखाड़ों के साधु-संत जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के साथ परियोजना का निरीक्षण करने पहुंचे थे। महंत देवगिरी महाराज, महंत सेवागिरी महाराज, महंत मुकुंदपुरी महाराज, महंत भगवान दास महाराज, महंत लालदास, महंत दिग्विजय दास, महंत विद्या भारती, राजीव लोचन दास महाराज सहित अन्य संतों ने जमालपुरा, रत्नाखेड़ी, रातडिय़ा और गंभीर डेम का दौरा किया। संतों ने शिप्रा नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए चल रहे कामों को सराहा। साथ ही मुख्यमंत्री द्वारा क्लोज डक्ट परियोजना को दी गई मंजूरी की प्रशंसा की।

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सिंहस्थ के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण
सिंहस्थ 2028 के लिहाज से 598.66करोड़ रुपए की कान्ह डायवर्शन क्लोज डक्ट परियोजना बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसके तहत जमालपुर के पास कान्ह नदी पर बैराज बनाया जाएगा। यहां से गंभीर बांध के डाउन स्ट्रीम क्षेत्र तक 28.650 किलोमीटर लंबी एवं 4.5 मीटर की डी आकार आरसीसी बॉक्सनुमा पाइप लाइन बिछाई जाएगी। इसके जरिए कान्ह का दूषित पानी डायवर्ट होगा। 42 माह यानी वर्ष 2027 तक परियोजना के निर्माण कार्य को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

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