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ओडिशा के 12 कलाकार के हाथों से राजस्थान के लाल पत्थरों पर आकार ले रहे हैं सप्तऋषि

महाकाल लोक में लगने वाली सप्तऋषियों की मूर्तियां हाट बाजार में बन रही, मार्च-अप्रैल 2025 तक की डेडलाइन

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अक्षरविश्व न्यूज|उज्जैन। श्री महाकाल महाकाल में आंधी-तूफान में गिरकर खंडित हुईं सप्तऋर्षियों की नई मूर्तियां हरिफाटक ब्रिज के नीचे बने हाट बाजार में आकार ले रही हैं। ओडिशा के १२ कलाकारों की टीम दिन-रात इन्हें बनाने में जुटी। अब तक तीन मूर्तियों आकार ले चुकी हैं। इसके अलावा जिन कमल के आकारनुमा स्टैंड पर यह मूर्तियां लगाई जाएंगी उन्हें भी बनाया जा रहा है। इसके बाद ४ अन्य मूर्तियों पर काम शुरू होगा। कलाकारों का कहना है कि हमें मार्च-अप्रैल २०२५ तक की डेडलाइन दी गई है।

बंशी पहाड़ पत्थर से बन रही

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राजस्थान में मिलने वाले लाल रंग के बंशी पहाड़ पत्थर से मूर्तियां बनाई जा रही हैं। इन्हें बनाने में ईश्वरचंद्र महाराणा, प्रमोद महाराणा, सुरेशचंद्र ओझा, जीवन ज्योति महाराणा, विष्णु ओझा, गणेश दास, राका सेठी, सुनील कांडी सहित ४ अन्य कलाकार जुटे हैं। ईश्वरचंद्र महाराणा ने बताया कि राजस्थान में मिलने वाला यह पत्थर काफी मजबूत होता है। इससे बनने वाली मूर्तियों को सालोंसाल कुछ नहीं होगा।

सेंपल देखकर बना रहे मूर्तियां

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पत्थर से मूर्तियों बनाने के लिए कलाकारों को फाइबर से बनी सप्तऋषियों की छोटी मूर्तियां सेंपल के तौर पर दी गई हैं। इसी को देखकर कलाकार पत्थर पर मूर्तियों को हुबहू आकार दे रहे हैं ताकि उसमें जरा सा भी फर्क ना दिखे। कलाकारों का कहना है कि एक मूर्ति को बनाने में करीब दो माह का वक्त लगता है।

आंधी तूफान से गिरी थीं मूर्तियां

दरअसल, 28 मई 2023  को अचानक आए आंधी-तूफान और बारिश के चलते महाकाल महालोक में बनी सप्तऋषियों की मूर्तियां जमीन पर गिर गई थीं जिसके कारण एक मूर्ति की गर्दन टूट गई थी, जबकि दो मूर्तियों के हाथ टूटे थे, वहीं कुछ मूर्तियों के सिर पर क्रेक आया था जिसके बाद पूरे देश में उज्जैन की किरकिरी हुई थी। कांग्रेस ने भी भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 अक्टूबर 2022 को महाकाल लोक का लोकार्पण किया था।

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