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शक्कर के भाव 20 दिन में 30 प्रतिशत गिरे, कारण स्टॉक करने पर हुई सख्ती

तुअर और चना दाल में तेजी का रुख, पर मसालों का बाजार अभी स्थिर

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। थोक भाव में शक्कर के दाम 30 प्रतिशत गिर गए हैं। भावों में यह गिरावट 20 दिन में आई है। इससे पहले जनवरी और जुलाई में भाव बढऩे के कारण शक्कर थोक में 7 हजार रुपए क्विंटल के भाव से बिक रही थी। प्रशासनिक सख्ती के कारण शनिवार को थोक में शक्कर के भाव 4900 रुपए क्विंटल आ गए। रविवार को बाजार बंद था।

सोमवार को भाव सुधरे और शक्कर 5050 रुपए क्विंटल और मंगलवार को 5200 रुपए क्विंटल के भाव बिकी। पिछले दिनों तब शक्कर के भाव गिरे थे तब खेरची में किराना व्यवसायियों ने शक्कर के भाव कम नहीं किए इस कारण ग्राहकों तक इसका लाभ नहीं मिला। थोक में 4900 रुपए क्विंटल भाव होने के बावजूद किराना दुकानों पर शक्कर 60 रुपए किलो के भाव में मिल रही है।

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पिछली बार अंतर्राष्ट्रीय बाजार में तेजी के कारण बढ़े थे भाव
जानकारी के अनुसार चीनी मिलों में गन्ने का कोटा कम करने से जुलाई में शक्कर के भाव बढ़े थे। इससे पहले जनवरी में भी शक्कर महंगी हो गई थी। इसका कारण अंतर्राष्ट्रीय बाजार में तेजी और युद्ध के कारण क्रूड ऑइल की कीमत बढऩे से परिवहन नहीं हो पाना बताया था। उस समय शक्कर के साथ कास्मेटिक्स ड्रायफ्रूट्स और खाद्य तेल के भी भाव बढ़े थे। सितंबर में अन्य वस्तुओं के भाव तो वही हैं परंतु शक्कर के भाव गिर गए हैं। मध्यप्रदेश में शक्कर महाराष्ट्र, कर्नाटक और गुजरात से आती है। भाव गिरने का कारण आवक बढऩा नहीं बल्कि नियमों में बदलाव बताया जा रहा है।

स्टॉक नहीं कर सकते इसलिए गिरी कीमत
थोक शक्कर व्यापार के कमीशन एजेंट राजेंद्र गर्ग ने बताया भाव गिरने पर पूर्व में व्यापारी स्टॉक कर लेते थे इसलिए गिरावट का असर मार्केट में नहीं दिख पाता था। अब शासन ने व्यापारियों के स्टॉक की लिमिट तय कर दी है। और नियम में सख्ती भी बरती जा रही है इसलिए स्टॉक नहीं कर पाने के कारण शक्कर भाव गिरे हैं।

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आयातित शक्कर बाजार में नहीं आई
व्यापारियों ने बताया जनवरी में शक्कर की तेजी के बाद जुलाई में जब भाव बढ़े तो नियंत्रण के लिए शासन ने शक्कर आयात की थी। आयात की हुई शक्कर अभी मार्केट में नहीं आई है। इसलिए वर्तमान में भाव नहीं गिर रहे हैं।

दालों में चल रही है तेजी
व्यापारियों के अनुसार इस समय दाल और देसी घी में तेजी चल रही है। परंतु यह तेजी 10-15 रुपए से ज्यादा की नहीं है। तुअर दाल 20 दिन पहले थोक में 114 रुपए किलो थी तो अब बढ़कर 125 रुपए हो गई है। इसी तरह चना दाल 76 रुपए से बढ़कर 81 रुपए हो गई। मूंग, उड़द की डिमांड कम है। इस कारण ं तेजी मंदी 5 रुपए से कम है। तुअर दाल में तेजी का कारण सावन खत्म होना है। व्यापारियों के अनुसार सावन में उपवास के कारण तुअर दाल की खपत कम हो जाती है। इसलिए भाव भी गिर जाते हैं।

मसाला बाजार में बदलाव नहीं
एक तरफ शक्कर में गिरावट और दालों में तेजी आई है तो दूसरी तरफ मसालों के भाव तीन महीने से स्थिर हैं। थोक व्यापारी ऋषभ जैन ने बताया भारत में मसाले सिर्फ केरल और आसपास के क्षेत्र में होते हैं। पूरे भारत की डिमांड अधिक है इसलिए चायना, वियतनाम, कोलंबो, मेडागास्कर सहित अन्य देशों से मसालों का आयात होता है। लौंग में प्रति किलो 100 रुपए की तेजी आई है। पूर्व में 800 रुपए किलो भाव थे जो क्वालिटी के अनुसार 900 से 950 रुपए किलो बिक रही है।

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