रावण दहन शास्त्र सम्मत नहीं, इसकी आड़ में हो रहा ब्राह्मणों का अपमान

अखिल भारतीय युवा ब्राह्मण समाज ने आयोजक समितियों को पत्र भेजकर कुप्रथा बंद करने की मांग की
अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। दशहरा पर्व नजदीक है और रावण दहन को लेकर विवाद शुरू हो गया है। अखिल भारतीय युवा ब्राह्मण समाज ने रावण दहन को शास्त्र सम्मत नहीं बताते हुए आयोजन समितियों को पत्र भेजे हैं। इसमें रावण दहन की कुप्रथा बंद करने की मांग की गई है। समितियों से स्पष्टीकरण भी मांगा है।
दरअसल, अखिल भारतीय युवा ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष अर्पित पुजारी और संगठन मंत्री किशन पांडे ने रावण दहन समितियों से पूछा है कि वे करोड़ों सनातनियों को बताएं कि रावण दहन का उल्लेख किस शास्त्र, पुराण या धर्म ग्रंथ में है। यदि यह शास्त्र सम्मत है, तो ही रावण दहन करें। अन्यथा नहीं। क्योंकि महापंडित रावण ने ऐसा कोई गलत कृत्य नहीं किया था कि उसके पुतले का दहन कर खुशी जाहिर की जाए।
पदाधिकारियों ने कहा कि अंग्रेजों और मुस्लिमों ने भी ब्राह्मणों का अपमान कर उनकी शिखा (चोटी)और यज्ञोपवीत (जनेऊ) काटे थे। मौजूदा समय में सनातन धर्म की रक्षा करने वाली पार्टी भी इस कुप्रथा को रोकने में असमर्थ है। इससे ब्राह्मणों के मान-सम्मान को ठेस पहुंच रही है। अखिल भारतीय युवा ब्राह्मण समाज ने देश की समस्त संस्थाओं से रावण दहन की कुप्रथा बंद करने की मांग की है।
शासन-प्रशासन से भी करेंगे मांग
समितियों ने प्रमाण नहीं दिए तो शासन-प्रशासन से रावण दहन बंद कराने की मांग की जाएगी। इस संबंध राष्ट्रपति, पीएम, सीएम को ज्ञापन दिया जाएगा। इसके लिए जागरुकता अभियान भी पूरे देभ में चलाया जा सकता है।
किशन पांडे, मंत्री
अभा युवा ब्राह्मण समाज









