एथेनॉल फ्यूल पर वायरल दावा फेक, सरकार ने बताई सच्चाई

देशभर में E20 पेट्रोल को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह की चर्चाएं और दावे सामने आ रहे हैं। कहीं इंजन खराब होने की बात कही जा रही है, कहीं वाहनों पर चींटियां चढ़ने का दावा किया जा रहा है, तो कहीं यह कहा जा रहा है कि E20 ईंधन इस्तेमाल करने पर वाहन बीमा अमान्य हो सकता है। बढ़ती अफवाहों के बीच केंद्र सरकार ने पहली बार विस्तृत रूप से स्थिति स्पष्ट की है और इन दावों को भ्रामक बताया है।

वैज्ञानिक परीक्षणों के बाद लागू किया गया कार्यक्रम
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम की शुरुआत वर्ष 2003 में की गई थी। इसका उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाना और प्रदूषण में कमी लाना है। मंत्रालय का कहना है कि E20 पेट्रोल को लंबे तकनीकी परीक्षणों, वैज्ञानिक मूल्यांकन और वाहन निर्माताओं तथा तेल कंपनियों से व्यापक चर्चा के बाद चरणबद्ध तरीके से लागू किया गया है।
इंजन खराब होने की कोई बड़ी शिकायत नहीं
सोशल मीडिया पर कई वीडियो और पोस्ट में दावा किया गया कि E20 पेट्रोल से वाहनों के इंजन खराब हो रहे हैं। इस पर सरकार ने कहा कि E20 लागू होने के बाद से अब तक इंजन फेल होने या बड़े पैमाने पर वाहनों में खराबी आने जैसी कोई प्रमाणित शिकायत सामने नहीं आई है। सरकार, तेल कंपनियां और संबंधित एजेंसियां लगातार इस कार्यक्रम की निगरानी कर रही हैं।
नमी और पानी को लेकर भी भ्रम दूर किया
कुछ वायरल दावों में कहा गया कि एथेनॉल हवा से नमी खींचता है, जिससे वाहन को नुकसान हो सकता है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार के ईंधन में पानी मिलना नुकसानदायक होता है। यह केवल एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल की समस्या नहीं है। आधुनिक वाहनों के ईंधन टैंक इस प्रकार तैयार किए जाते हैं कि उनमें बाहरी नमी या पानी आसानी से प्रवेश न कर सके।
गन्ने का रस सीधे पेट्रोल में नहीं मिलाया जाता
हाल के दिनों में कुछ वीडियो में यह दिखाया गया कि गन्ने का रस सीधे पेट्रोल में मिलाया जा रहा है। सरकार ने ऐसे दावों को पूरी तरह गलत बताया है। मंत्रालय के अनुसार ईंधन ग्रेड एथेनॉल कई औद्योगिक प्रक्रियाओं से होकर गुजरता है, जिनमें किण्वन, आसवन और गुणवत्ता परीक्षण शामिल हैं। अंतिम उत्पाद में गन्ने, मक्का या अन्य कृषि उत्पादों के मूल गुण नहीं रहते।
चींटियां लगने वाले दावे का भी खंडन
एक वायरल वीडियो में वाहन के फ्यूल कैप के आसपास चींटियां दिखाई गई थीं। इस पर भारत पेट्रोलियम ने कहा कि ईंधन में उपयोग होने वाले एथेनॉल में कोई शर्करा नहीं बचती। इसके अलावा इसमें ऐसे तत्व भी मिलाए जाते हैं जो कीटों को दूर रखने में मदद करते हैं। कंपनी के अनुसार E20 पेट्रोल और चींटियों के आकर्षित होने के बीच कोई वैज्ञानिक संबंध नहीं पाया गया है।
बीमा रद्द होने की बात भी गलत
कुछ लोगों ने दावा किया कि E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने पर वाहन बीमा अमान्य हो सकता है और दुर्घटना की स्थिति में दावा खारिज किया जा सकता है। सरकार ने इस दावे को भी पूरी तरह गलत बताया है। संबंधित पक्षों से चर्चा के बाद स्पष्ट किया गया है कि E20 पेट्रोल के उपयोग का वाहन बीमा की वैधता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
दुनिया के कई देशों में पहले से उपयोग
सरकार का कहना है कि एथेनॉल मिश्रित ईंधन केवल भारत में ही नहीं, बल्कि अमेरिका, ब्राजील और जापान जैसे देशों में भी लंबे समय से इस्तेमाल किया जा रहा है। ब्राजील में तो E27 ईंधन नियमित रूप से उपयोग में लाया जाता है, जिसमें 27 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित होता है।
सरकार ने गिनाए बड़े फायदे
सरकार के अनुसार एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम से देश को अब तक लगभग 1.4 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा बचाने में मदद मिली है। कच्चे तेल के आयात में कमी आई है, किसानों की उपज की मांग बढ़ी है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है। इसके अलावा यह कार्यक्रम ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने और कार्बन उत्सर्जन कम करने में भी सहायक साबित हो रहा है।
क्या होता है एथेनॉल?
एथेनॉल एक प्रकार का अल्कोहल है, जिसे गन्ने के रस, मक्का, टूटे चावल और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है। इसे पेट्रोल में मिलाकर अपेक्षाकृत स्वच्छ ईंधन के रूप में उपयोग किया जाता है। वर्तमान में प्रथम और द्वितीय पीढ़ी के एथेनॉल का उत्पादन किया जा रहा है, जबकि शैवाल आधारित तृतीय पीढ़ी के जैव ईंधन पर भी काम चल रहा है।
E85 और फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक पर भी सरकार का जोर
हाल ही में सरकार ने फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए E85 ईंधन भी पेश किया है, जिसमें 85 प्रतिशत एथेनॉल और 15 प्रतिशत पेट्रोल होता है। हालांकि इसका उपयोग केवल विशेष फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक वाले वाहनों में ही किया जा सकता है। सरकार का मानना है कि आने वाले वर्षों में जैव ईंधन आधारित परिवहन व्यवस्था देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर प्रसारित अपुष्ट वीडियो और दावों पर भरोसा न करें तथा किसी भी जानकारी की पुष्टि आधिकारिक स्रोतों से ही करें।









