आतंकियों को पनाह देने वालों पर मिलकर एक्शन लेंगे…

ब्रिक्स के साझा बयान में पहलगाम हमले की निंदा, टेरर फंडिंग रोकने पर जोर; कहा
नई दिल्ली। रूस और चीन समेत ब्रिक्स देशों ने पहलगाम आतंकी हमले की निंदा की है। देशों ने कहा कि आतंकियों को पनाह देने वालों के खिलाफ मिलकर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, आतंकियों तक पहुंचने वाली फंडिंग रोकने और उन्हें सुरक्षित ठिकाने देने वालों पर कार्रवाई करने पर भी सहमति बनी है। ब्रिक्स देशों के बीच संयुक्त बयान जारी करने पर सहमति ऐसे समय में बनी है, जब पश्चिम एशिया में तनाव है और ईरान, सऊदी अरब और यूएई के कई मुद्दों पर अलग-अलग रुख हैं। भारत ने लगातार बातचीत के जरिए इन मतभेदों को दूर करने और सदस्य देशों के बीच आम सहमति बनाने में अहम भूमिका निभाई।
साझा मुद्रा पर कोई प्लान नहीं
विदेश मंत्रालय के आर्थिक संबंध सचिव सुधाकर दलेला ने कहा कि अभी ब्रिक्स देशों की अपनी कोई साझा मुद्रा शुरू करने का प्रस्ताव नहीं है। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देशों के बीच एक-दूसरे की स्थानीय मुद्रा में लेन-देन को लेकर पहले से बातचीत चल रही है। इसका मकसद कारोबार में लगने वाला खर्च कम करना है। दलेला ने कहा कि स्थानीय मुद्रा में भुगतान की व्यवस्था मौजूदा वैश्विक भुगतान व्यवस्था का विकल्प नहीं, बल्कि उसे और बेहतर बनाने का एक तरीका है।
10 सबसे अहम बातें
पहलगाम आतंकी हमले की निंदा: 22 अप्रैल 2025 के हमले की कड़ी निंदा, 26 लोगों की मौत का जिक्र।
आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख: आतंकवाद के हर रूप और हर वजह की निंदा की गई।
आतंकवाद को धर्म से न जोड़ें: आतंकवाद को किसी धर्म, राष्ट्रीयता या समुदाय से जोडऩे का विरोध।
सीमा पार आतंकवाद पर कार्रवाई:आतंकवाद, उसकी फंडिंग और आतंकियों को पनाह देने वालों के खिलाफ मिलकर कार्रवाई पर जोर।
आतंकियों की जवाबदेही तय हो: आतंकियों और आतंकी संगठनों के खिलाफ सामूहिक कार्रवाई की बात।
संयुक्त राष्ट्र की आतंकरोधी संधि जल्द बने: अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर प्रस्तावित संधि को जल्द अपनाने की मांग।
ब्रिक्स के मूल सिद्धांत मजबूत होंगे: आपसी सम्मान, संप्रभु समानता, एकजुटता और सहमति से फैसलों पर जोर।
एकतरफा टैरिफ की निंदा: एकतरफा टैरिफ और व्यापारिक पाबंदियों पर चिंता जताई गई। कहा कि ऐसे कदम डब्ल्यूटीओ के नियमों के अनुरूप होने चाहिए।
परमाणु खतरा: परमाणु हथियारों के इस्तेमाल के खतरे और बढ़ते वैश्विक तनाव पर चिंता जताई गई।
भारत की अध्यक्षता की सराहना: ब्रिक्स देशों ने भारत की अध्यक्षता में हुए ब्रिक्स प्लस और आउटरीच संवाद की सराहना की।
मोदी-जिनपिंग बोले- मतभेद विवाद में न बदलें
पीएम मोदी ने दिल्ली में ब्रिक्स समिट से अलग चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से द्विपक्षीय बैठक की। यह मीटिंग करीब 50 मिनट चली। मोदी और जिनपिंग ने इस बात पर भी सहमति जताई कि मतभेदों को विवाद नहीं बनने देना चाहिए और संबंध लंबे चलने चाहिए। पीएम मोदी ने जोर दिया कि दोनों देशों के संबंध तीन ‘पारस्परिक सिद्धांतोंÓ- सम्मान, संवेदनशीलता और हित से जुड़े होने चाहिए। जिनपिंग करीब 7 साल बाद भारत आए हैं। गलवान झड़प के बाद यह उनका पहला भारत दौरा है।
जिनपिंग इससे पहले 11 अक्टूबर 2019 को भारत आए थे। 15 जून 2020 को गलवान झड़प हुई थी। इसके बाद भारत-चीन रिश्तों में तनाव बढ़ा, लेकिन कारोबार नहीं रुका। 2020-21 में चीन से भारत का आयात करीब 65 अरब डॉलर था, जो 2025-26 में बढ़कर 132 अरब डॉलर से ज्यादा हो गया। यानी गलवान झड़प के बाद चीन से आयात दोगुना हो गया है। पीएम मोदी ने कहा कि मैं भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान चीन से मिले समर्थन और सहयोग के लिए आभार व्यक्त करता हूं। अब हमारे पास द्विपक्षीय सहयोग पर चर्चा करने का अवसर है। एक बार फिर, आपका भारत में हार्दिक स्वागत है। जिनपिंग बोले- चीन ने हमेशा भारत के साथ अपने संबंधों को बेहतर बनाए रखने का समर्थन किया है। हालांकि हमारे दोनों देशों की राष्ट्रीय परिस्थितियां अलग हैं, फिर भी हम एक-दूसरे की खूबियों से पूरी तरह सीख सकते हैं।









