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भोजशाला : कई बलिदानों के बाद सनातन की जीत

शहर के प्रबुद्धजनों ने जताई फैसले पर खुशी, मोहननगर में पूजन कर की मां सरस्वती की वंदना

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। हाई कोर्ट की इंदौर बेंच द्वारा भोजशाला सरस्वती मंदिर घोषित किए जाने का शहर के प्रबुद्धजनों ने स्वागत किया है। उनका कहना है कि कई बलिदानों के बाद सनातन को यह जीत मिली है। अक्षरविश्व ने फैसले पर लोगों से बात की और सभी ने इसे बड़ा फैसला बताया।

मोहननगर चौराहे पर मनाया उत्सव: भोजशाला पर आए फैसले के सम्मान में मोहननगर चौराहे पर उत्सव मनाया गया। इस दौरान मां सरस्वती की आराधना की गई और मां शारदे की आरती गई गई। फोटो पर पुष्पाहार अर्पित किए गए।

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बहुत लंबी लड़ाई लडऩी पड़ी
भोजशाला मंदिर है, यह ऐतिहासिक तथ्य सबको मालूम है, बावजूद मंदिर साबित करने के लिए कोर्ट में लंबी लड़ाई लडऩी पड़ी। फिर भी यह फैसला बहुत बड़ा है। इस आंदोलन में हमारे साथी भी लगे हुए थे। हमारी अब भारत सरकार से मांग है कि वह लंदन से मां सरस्वती की प्रतिमा लाकर उसे भोजशाला में स्थापित करे।
मयूर अग्रवाल, कपड़ा व्यापारी

900 साल के संघर्ष का फल
900 साल के संघर्ष का मीठा फल मिला है। कई बलिदान देने के बाद आज यह साबित हो गया कि भोजशाला मां सरस्वती का मंदिर है। हम कोर्ट के आभारी हैं।
चिन्मय साहू, उद्योगपति

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जैन अभिभाषकों ने ताकत से पक्ष रखा
भोजशाला को देवी सरस्वती का मंदिर साबित करने के लिए जैन अभिभाषक विष्णुशंकर जैन और हरिशंकर जैन ने मजबूती से सनातन का पक्ष रखा। सनातन धर्म के लिए उनका यह बड़ा योगदान है। उनके इस योगदान के लिए सकल जैन समाज और सनातन समाज उनका ऋणी रहेगा।
वंदना जैन
अध्यक्ष श्री सकल जैन
समाज श्राविका विंग

मप्र की अयोध्या बनाएंगे
भोजशाला मप्र की अयोध्या है। मोहम्मद खिलजी ने 900 साल पहले मंदिर तोड़ा था। 1952 से भोजशाला समिति संघर्ष कर रही है। जयभानसिंह पवैया के नेतृत्व में 1996 में बड़ा आंदोलन खड़ा किया गया। तब की कांग्रेस सरकार ने कितने जुल्म ढाए। हाई कोर्ट का फैसला स्वागत योग्य है। भारत सरकार से मांग की कि वह लंदन से सरस्वती प्रतिमा लाकर स्थापित करे। भोजशाला को वैभवशाली बनाएं।
शिवेंद्र तिवारी
हिंदू नेता और पार्षद

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