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मूवी रिव्यू: कॉकटेल 2

“नया प्यार रोमांच से भरा होता है, लेकिन पुराना रिश्ता उस पुरानी, आरामदायक टी-शर्ट जैसा है जिसे पहनकर हम सबसे ज्यादा सुकून महसूस करते हैं।” फिल्म के मुख्य किरदार कुणाल (शाहिद कपूर) का यह वन-लाइनर असल में निर्देशक होमी अदजानिया की नई पेशकश ‘कॉकटेल 2’ की आत्मा को बयां करता है। लेकिन अफसोस, इस एक खूबसूरत विचार को पर्दे पर उतारने के लिए मेकर्स ने दर्शकों को ढाई घंटे के एक बेहद साधारण और उलझे हुए त्रिकोणीय प्रेम जाल में झोंक दिया है। फिल्म में विजुअल अपील और चकाचौंध तो भरपूर है, लेकिन कहानी की आत्मा कहीं खो गई है।

 

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बता दें कि साल 2012 में आई मूल ‘कॉकटेल’ में सैफ अली खान, दीपिका पादुकोण (वेरोनिका) और डायना पेंटी (मीरा) की तिकड़ी ने जो भावनात्मक जादू चलाया था, उसकी महक इस स्पिरिचुअल सीक्वल से पूरी तरह गायब है।

क्या है इस बार की कहानी?

इस नए सीक्वल का ताना-बाना दीया (रश्मिका मंदाना) और कुणाल (शाहिद कपूर) के इर्द-गिर्द बुना गया है, जो पिछले 16 वर्षों से एक-दूसरे के हमसफर हैं। इतने लंबे जुड़ाव के बाद अब उनके रिश्ते का शुरुआती आकर्षण और गर्माहट कम होने लगी है। इसी बीच, कुणाल द्वारा किया गया वफादारी से जुड़ा एक मज़ाक दीया के मन में शक का बड़ा कारण बन जाता है।

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इस मानसिक तनाव से ब्रेक लेने के लिए यह जोड़ा इटली के खूबसूरत शहर सिसिली में छुट्टियां बिताने पहुंचता है। वहां दीया की मुलाकात अपनी पुरानी स्कूल फ्रेंड एली (कृति सेनन) से होती है, जो बेहद आजाद ख्याल और बेपरवाह जिंदगी जीने वाली लड़की है। अपने पार्टनर की लॉयल्टी का लाइव टेस्ट लेने के लिए दीया अपनी इसी सहेली एली से कहती है कि वह कुणाल के साथ फ्लर्ट करे। दीया का इरादा सिर्फ अपने मंगेतर को परखना था, लेकिन कहानी तब पूरी तरह पलट जाती है जब एली सचमुच कुणाल के प्यार की गिरफ्त में आ जाती है।

लेखन और निर्देशन के स्तर पर कहां रह गई कमी?

फिल्म में वही पुराने इमोशन्स—प्यार, दोस्ती, गलतफहमी और जलन को भुनाने की कोशिश की गई है। मगर बड़ा बदलाव इसकी स्क्रिप्टिंग में है। पिछली फिल्म जहां इम्तियाज अली की गहरी और संजीदा कलम से निकली थी, वहीं इस बार इसकी जिम्मेदारी लव रंजन ने संभाली है। यही वजह है कि दोनों की सिनेमाई समझ का अंतर साफ दिखता है; फिल्म मॉडर्न तो लगती है पर किरदारों के जज्बात बेहद उथले नजर आते हैं।

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स्क्रीनप्ले का सेकेंड हाफ सीधे तौर पर हॉलीवुड की कल्ट फिल्म ‘माय बेस्ट फ्रेंड वेडिंग’ के ट्रैक की याद दिलाता है। हालांकि, तकनीकी रूप से संथाना कृष्णन रविचंद्रन की सिनेमैटोग्राफी लाजवाब है, जिन्होंने सिसिली की वादियों को बड़े पर्दे पर बेहद जादुई ढंग से उतारा है। अनाइटा श्रॉफ अदजाइनिया की स्टाइलिंग किरदारों को बेहद हॉट और स्टाइलिश लुक देती है, लेकिन इस तमाम ताम-झाम के बाद भी कृति सेनन का किरदार दीपिका की ‘वेरोनिका’ जैसा कल्ट प्रभाव छोड़ने में नाकाम रहता है।

कैसी है स्टार कास्ट की परफॉर्मेंस?

  • शाहिद कपूर: एक बेहद मंझे हुए अभिनेता होने के बावजूद शाहिद कपूर इस फिल्म में अपनी चमक खोते दिखे। फिल्म के आखिरी हिस्से के एक भावुक दृश्य को छोड़ दें, तो बाकी जगहों पर वे हल्के-फुल्के सीन्स में जरूरत से ज्यादा लाउड (ओवर-एक्टिंग) लगते हैं।

  • कृति और रश्मिका: कृति सेनन स्क्रीन पर बेहद ग्लैमरस और आकर्षक लगी हैं। वहीं रश्मिका मंदाना भी अपनी खास बोली और एक्सेंट के साथ दीया के किरदार में ठीक-ठाक फिट बैठती हैं।

  • म्यूजिक: संगीतकार प्रीतम का म्यूजिक एल्बम फिल्म की गति के साथ न्याय करता है। ‘माशूका’, ‘जब तलक’ और ‘बंधू 2.0’ जैसे ट्रैक भले ही चार्टबस्टर न बन पाएं, लेकिन सिनेमाघर में देखते वक्त कानों को अच्छे लगते हैं।

फिल्म के मुख्य आकर्षण और कमजोरियां:

  • नया दृष्टिकोण: 2012 की सुपरहिट रोमांटिक-ड्रामा को आधुनिक और नए किरदारों के साथ पेश करने का प्रयास।

  • कमजोर कड़ियां: लव रंजन की स्क्रिप्ट में भावनाओं की कमी और हॉलीवुड फिल्मों से प्रेरित स्क्रीनप्ले दर्शकों को पूरी तरह बांधने में असफल रहता है।

  • प्लस पॉइंट्स: इटली की बेहतरीन लोकेशंस, शानदार कॉस्ट्यूम डिजाइनिंग और प्रीतम का बैकग्राउंड स्कोर फिल्म का मजबूत पक्ष हैं।

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