मूवी रिव्यू: द ग्रेट ग्रैंड सुपरहीरो- एलियंस का आगमन

भारतीय सिनेमा को सौ साल से ज्यादा का समय हो चुका है, लेकिन बच्चों को केंद्र में रखकर बनने वाली फिल्मों की संख्या आज भी बेहद कम है। ऐसे में अब जैकी श्रॉफ की नई फिल्म ‘द ग्रेट ग्रैंड सुपरहीरो- एलियंस का आगमन’ सिनेमाघरों में रिलीज हुई है, जिसने फैमिली और बच्चों के मनोरंजन की कमी को कुछ हद तक पूरा करने की कोशिश की है। फिल्म की कहानी भले ही पूरी तरह फैंटेसी से भरी हो, लेकिन इसकी सादगी और इमोशनल टच दर्शकों को बांधे रखने में कामयाब नजर आता है।
दादाजी को बना दिया सुपरहीरो
फिल्म की कहानी छोटे बच्चे दीपू और उसके दादाजी जगदीशचंद्र के इर्द-गिर्द घूमती है। नए शहर और नए स्कूल में पहुंचे दीपू को अपने दोस्तों के बीच खास बनने की चाह होती है। इसी दौरान वह अपने सहपाठियों से दावा कर देता है कि उसके दादाजी कोई साधारण बुजुर्ग नहीं बल्कि पृथ्वी को एलियंस से बचाने वाले सुपरहीरो हैं।
दीपू इतना ही नहीं रुकता, बल्कि यह भी कहता है कि अगर इस राज के बारे में किसी बड़े इंसान को पता चल गया तो दादाजी अपनी सारी शक्तियां खो देंगे। उसका दोस्त लड्डू इस बात पर तुरंत भरोसा कर लेता है, जबकि एक दूसरा बच्चा चाणक्य लगातार इस रहस्य पर शक करता रहता है।
कहानी में आता है बड़ा ट्विस्ट
फिल्म में असली मोड़ तब आता है जब सचमुच दो एलियंस पृथ्वी पर पहुंच जाते हैं। वे चेतावनी देते हैं कि जल्द ही एलियंस की बड़ी सेना धरती पर हमला करने वाली है। इसके बाद सबकी उम्मीदें दीपू के दादाजी पर टिक जाती हैं।
हालांकि मजेदार बात यह है कि जगदीशचंद्र खुद उम्र से जुड़ी परेशानियों से जूझ रहे एक साधारण बुजुर्ग हैं। उन्हें कमर दर्द, कमजोरी और कई हेल्थ समस्याएं रहती हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या वे सच में सुपरहीरो हैं या यह सिर्फ बच्चों की कल्पना है। फिल्म इसी रहस्य को मजेदार अंदाज में आगे बढ़ाती है।
फर्स्ट हाफ ज्यादा मजबूत
फिल्म का पहला हिस्सा काफी हल्का-फुल्का और मनोरंजक लगता है। बच्चों की शरारतें और दादा-पोते की बॉन्डिंग कई जगह दिल जीतती है। हालांकि दूसरे हिस्से में कहानी थोड़ी बिखरी हुई महसूस होती है। इसके बावजूद एलियंस की एंट्री के बाद फिल्म फिर से रफ्तार पकड़ लेती है।
अगर दर्शक इस फिल्म से बड़े सुपरहीरो यूनिवर्स जैसी हाई लेवल एक्शन या भारी VFX की उम्मीद करेंगे तो उन्हें थोड़ी निराशा हो सकती है। सीमित बजट की वजह से विजुअल इफेक्ट्स कई जगह कमजोर नजर आते हैं, लेकिन फिल्म अपनी भावनात्मक कहानी और देसी अंदाज से मनोरंजन बनाए रखती है।
जैकी श्रॉफ ने जीता दिल
अभिनय की बात करें तो जैकी श्रॉफ ने दादाजी के किरदार में शानदार काम किया है। उन्होंने एक साधारण बुजुर्ग और बच्चों की नजर में सुपरहीरो बनने के बीच के फर्क को बेहद सहज तरीके से निभाया है। उनके और बाल कलाकार मिहिर गोडबोले के बीच की केमिस्ट्री फिल्म को और मजेदार बना देती है।
फिल्म में बच्चों की पूरी टोली ने भी शानदार अभिनय किया है। खासतौर पर लड्डू और चाणक्य के किरदार कहानी में लगातार मनोरंजन जोड़ते रहते हैं। वहीं एलियन किरदारों ने भी कई जगह हंसी और रोमांच दोनों पैदा किए हैं।
बच्चों और परिवार के लिए हल्की-फुल्की फिल्म
‘द ग्रेट ग्रैंड सुपरहीरो’ कोई भारी-भरकम सुपरहीरो फिल्म नहीं है, बल्कि यह बच्चों की कल्पनाओं, दादा-पोते के रिश्ते और मासूम फैंटेसी को दिखाने वाली हल्की-फुल्की फैमिली एंटरटेनर है। यही वजह है कि कमियों के बावजूद फिल्म कई जगह दिल को छूने में सफल रहती है।




