लापरवाही से छात्रा की मौत, कोर्ट ने एजेडी और डॉक्टर को भेजा जेल

नीलगंगा पुलिस ने जब्त कर लिए थे दस्तावेज, इसलिए रिमांड की जरूरत नहीं पड़ी
अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। मंछामन के निजी क्लीनिक में अपेंडिक्स ऑपरेशन के दौरान 11 वर्षीय छात्रा की मौत के आरोपी स्वास्थ्य विभाग के सहायक संयुक्त संचालक और क्लीनिक संचालक को कोर्ट ने जेल भेज दिया है। चूंकि हिरासत में ही पुलिस इनसे सारे दस्तावेज जब्त कर चुकी थी, इसलिए रिमांड की जरूरत ही नहीं पड़ी।
नीलगंगा पुलिस ने बुधवार को ही स्वास्थ्य विभाग के एडिशनल ज्वाइंट डायरेक्टर डॉ. देवेश तिवारी और क्लीनिक संचालक राजेश चौहान की गिरफ्तारी शो की थी। हालांकि चौहान चार दिन और तिवारी दो दिन से हिरासत में थे। इनसे नीलगंगा थाने में अलग-अलग पूछताछ की गई। बीती रात पूछताछ पूरी होने के बाद बुधवार सुबह दोनों की गिरफ्तारी दर्शाई गई और दोपहर में दोनों को जेएमएफसी किशनचंद्र पटेल की कोर्ट में पेश किया गया। यहां से दोनों को जेल भेजने के आदेश दिए गए।
बता दें कि मंछामन कॉलोनी स्थित जनसेवा नोबल पाली क्लीनिक में महिदपुर तहसील के ग्राम तीलियां खेड़ी निवासी मेहरबान सिंह की 11 वर्षीय बेटी दिव्या सूर्यवंशी का अपेंडिक्स ऑपरेशन किया गया था। लोकल एनेस्थिसीया देने से उसकी तबीयत बिगड़ गई थी। फ्रीगंज के लोकल अस्पताल भेजे जाने तक दिव्या की जान चली गई थी। परिजनों के विरोध प्रदर्शन पर आरोपी डॉक्टर पर कार्रवाई का दबाव बना था और डॉ. राजेश चौहान को गिरफ्तार किया गया था। चौहान के पास बीएचएमएस की डिग्री हैं और उसे केवल क्लीनिक चलाने की अनुमति थी। पर उसने स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त संचालक डीके तिवारी के साथ मिलकर दिव्या का ऑपरेशन कर दिया था।
कोर्ट में पेश किया जेल भेजने के आदेश
नोबल पॉली क्लीनिक सील है। दोनों आरोपी डॉ देवेश कुमार तिवारी और डॉ राजेश चौहान को गिरफ्तार कर लिया है। प्रकरण के लिए जरूरी दस्तावेज पहले ही जब्त हो चुके थे, इसलिए रिमांड की जरूरत नहीं थी। दोनों को कोर्ट में पेश किया था। जहां से जेल भेजने के आदेश हुए हैं।
तरुण कुरील, टीआई नीलगंगा
जेल जाने के पहले डॉ. तिवारी की तबीयत बिगड़ी, आईसीयू में भर्ती
अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। मंछामन कॉलोनी स्थित जनसेवा नोबल पॉली क्लीनिक में ऑपरेशन के बाद बच्ची की मौत के मामले मेें आरोपी असिस्टेंट ज्वाइंट डायरेक्टर डॉ. डीके तिवारी को बुधवार को कोर्ट ने जेल भेजने आदेश दिए थे। मेडिकल के वक्त डॉ. तिवारी ‘गंभीर बीमार’ पाए गए इस कारण उनका इलाज चरक अस्पताल के आईसीयू में किया जा रहा है। हालांकि गुरुवार सुबह डॉ. तिवारी आईसीयू के पास टहलते हुए दिखाई दे रहे थे।
कोर्ट ने नोबल पॉली क्लीनिक के संचालक डॉ. राजेश चौहान व डॉ. तिवारी को जेल भेजने के आदेश दिए थे। शाम को जेल भेजने के पहले उन्हें मेडिकल के लिए चरक अस्पताल लाया गया जहां डॉ. तिवारी ‘गंभीर बीमार’ पाए गए। इस कारण उन्हें आईसीयू में भर्ती किया गया। जबकि क्लीनिक संचालक डॉ. चौहान को जेल भेज दिया गया है। गौरतलब है कि नोबल पाली क्लीनिक में महिदपुर तहसील के ग्राम तीलियां खेड़ी निवासी मेहरबान सिंह की 11 वर्षीय बेटी दिव्या सूर्यवंशी की ऑपरेशन के बाद मौत हो गई थी। इस मामले में दोनों को बुधवार को नीलगंगा पुलिस ने गिरफ्तार किया था। कोर्ट ने जेल भेजने के आदेश दिए थे।









