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उज्जैन में पानी के लिए मचा हाहाकार, टैंकर आते ही टूट पड़ते लोग

उज्जैन में पानी के लिए मचा हाहाकार, टैंकर आते ही टूट पड़ते लोग

उज्जैन के विक्रमनगर इलाके की गांधीनगर और आसपास की कॉलोनियों में इन दिनों पानी का गंभीर संकट बना हुआ है। इलाके के करीब 400 परिवार लंबे समय से नियमित जल सप्लाई और नल कनेक्शन का इंतजार कर रहे हैं। तेज गर्मी के बीच हालात लगातार खराब होते जा रहे हैं और लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पानी की जुगाड़ में गुजर रही है।

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स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में स्थायी जल व्यवस्था नहीं होने के कारण पूरा इलाका पीएचई विभाग के टैंकरों पर निर्भर हो गया है। समस्या यह है कि पानी के टैंकर भी रोज नहीं पहुंचते। कई बार दो-दो और तीन-तीन दिन तक लोगों को पानी का इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में टैंकर आते ही पूरे इलाके में अफरा-तफरी जैसा माहौल बन जाता है।

इलाके की गलियों में सुबह से ही लोग खाली ड्रम, बाल्टियां, केन और पाइप लेकर बैठे नजर आते हैं। जैसे ही पानी का टैंकर पहुंचता है, लोग तेजी से उसकी ओर दौड़ पड़ते हैं। पानी भरने की जल्दी में कई लोग चलते टैंकर में पाइप डाल देते हैं, जबकि कुछ लोग ऊपर चढ़कर पानी भरने की कोशिश करते हैं। हालात इतने बिगड़ जाते हैं कि कई बार धक्का-मुक्की और बहस तक की नौबत आ जाती है।

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सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को उठानी पड़ रही है। कई परिवारों को पीने के पानी के लिए दूर-दराज इलाकों तक जाना पड़ता है। लोगों का कहना है कि अब आसपास के घरों से भी पानी मिलना मुश्किल हो गया है, क्योंकि लगभग हर परिवार पानी की कमी से जूझ रहा है। कई घरों में पीने का पानी अलग से लाना पड़ता है, जबकि नहाने और अन्य कामों के लिए अलग इंतजाम करना पड़ता है।

इलाके के लोगों के मुताबिक पानी के टैंकर आने का कोई तय समय नहीं होता। कभी टैंकर शाम को पहुंचता है तो कभी देर रात में आता है। ऐसे में लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ता है। कई महिलाएं अपना काम और मजदूरी छोड़कर सिर्फ पानी के इंतजार में बैठी रहती हैं। लोगों का कहना है कि अगर एक बार पानी भरने से चूक गए, तो पूरे परिवार को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

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स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से जल्द स्थायी जल व्यवस्था करने और नियमित सप्लाई शुरू कराने की मांग की है। उनका कहना है कि हर साल गर्मियों में यही स्थिति बनती है, लेकिन अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है।

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