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काशी में दिखी विक्रमादित्य महानाट्य की भव्यता

यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ देखने पहुंचे नाटक, सीएम डॉ. मोहन यादव भी हुए शरीक

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। उज्जैन के राजा विक्रमादित्य पर केंद्रित महानाट्य विक्रमादित्य की भव्यता देख शुक्रवार रात काशी के वासी भी भौचक रह गए। यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ ने खुद महानाट्य देखा और जमकर तारीफ की। सीएम डॉ. मोहन यादव भी नाटक देखने पहुंचे।

तीन दिवसीय सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य का भव्य शुभारंभ वाराणसी में बीती शाम हुआ। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि डॉ. मोहन यादव ने बाबा विश्वनाथ की नगरी को बाबा महाकाल की धरा से जोडऩे का विशिष्ट काम किया है। योगी ने कहा कि विक्रमादित्य और राजा भर्तृहरि सगे भाई थे। भर्र्तृहरि ने नाथ संप्रदाय से दीक्षा लेकर काशी की भूमि और चुनार के किले में साधना की थी।

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सम्राट विक्रमादित्य ने ही 2 हजार साल पहले अयोध्यानगरी की खोज की थी और महाराज लव और राममंदिर का निर्माण कराया था। विक्रमादित्य नीति शास्त्र और न्याय के पर्याय थे। आज पंचाग की नगरी काशी और महाकाल की नगरी उज्जैन मिलकर नया इतिहास लिख रहे हैं।

कुशवाह का सम्मान

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महानाटय प्रस्तुति के लिए राजेश कुशवाह को योगी आदित्यनाथ और डॉ. मोहन यादव ने सम्मानित भी किया। इस दौरान योगी आदित्यनाथ को वैदिक घड़ी भी भेंट की गई।

क्या है महानाट्य में

सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य में उज्जैन के प्रतापी राजा विक्रमादित्य के अनछुए व्यक्तित्व को दिखाया गया है। कैसे वह वेश बदलकर जनता का हाल जानते थे और उनकी समस्या का निराकरण करते थे।

200 कलाकार महानाट्य में भूमिका निभा रहे हैं। काशी में तीन मंच बनाए गए हैं। पहले पर महाकाल की प्रतिकृति प्रदर्शित की गई है।

महानाट्य में 18 घोड़े, दो रथ, चार ऊंट, एक पालकी और एक हाथी दृश्य को जीवंत कर रहे हैं।

आधुनिक टेक्नालॉजी का प्रयोग महानाट्य में किया जा रहा है।

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