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ना संसाधन-ना तैयारी, इसलिए शिप्रा में हादसे जारी

ना रस्सी, ना सूचना लिए बोर्ड, ना बैरिकेड्स, नदी का जलस्तर भी बढ़ा

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उज्जैन। शिप्रा के रामघाट सहित अन्य घाटों पर श्रद्धालुओं के साथ हादसे होने का सिलसिला लगातार जारी है, यहां संसाधनों के अभाव के चलते बाहर से आने वाले श्रद्धालु हादसों का शिकार हो रहे हैं लेकिन जिम्मेदारों के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही। घाटों पर ना तो रस्सी बंधी है, ना ही सूचना लिखे बोर्ड हैं और ना ही बैरिकेड्स लगे हैं। इसके अलावा नदी का जलस्तर भी पिछले एक माह से बढ़ा हुआ है जिससे श्रद्धालओं को गहराई का अंदाजा नहीं रहता और वह डूबने लगते हैं। 5 अप्रैल को अहमदाबाद से आए तीन दोस्त गुरुनानक घाट पर नहाने के दौरान गहरे पानी में चले गए थे जिन्हें होमगार्ड एवं एसडीईआरएफ के जवानों ने बचाया था।

दरअसल, महाकाल महालोक के बनने के बाद से उज्जैन में पर्यटन काफी बढ़ा है। देशभर से हजारों श्रद्धालु प्रतिदिन भगवान महाकाल सहित अन्य मंदिरों के दर्शन के लिए आते हैं। इसमें से अधिकांश श्रद्धालु शिप्रा में डुबकी लगाने के लिए रामघाट, दत्तअखाड़ा, गुरुनानक, सिद्ध आश्रम पर पहुंचते हैं लेकिन यहां सुरक्षा के इंतजाम नाकाफी हैं। स्थिति यह है कि पिछले एक माह से नदी का जलस्तर बढ़ा हुआ है, बावजूद इसके घाटों पर गहरे पानी में जाने से रोकने के लिए ना तो रस्सी बंधी है और ना ही सूचना लिखे बोर्ड लगे हैं, ऐसे में श्रद्धालुओं को गहराई का अंदाजा नहीं होता और वह हादसे का शिकार हो जाते हैं।

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होमगार्ड ने लगाई फ्लोटिन बॉल
रामघाट चौकी प्रभारी ईश्वरलाल चौधरी ने बताया बीते दिनों हुए हादसे और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए हमारे पास जो फ्लोटिन बॉल थी उसे रामघाट, दत्तअखाड़ा एवं गुरुनानक घाट के कुछ जगह लगाया है। यह काम नगर निगम का है, उन्हें यहां सुरक्षा के इंतजाम करने चाहिए।

सिर्फ अनाउंसमेंट का सहारा
रामघाट सहित अन्य घाटों पर सुरक्षा के लिहाज से राणोजी की छत्री से केवल अनाउंसमेंट हो रहा है लेकिन केवल अनाउंसमेंट के माध्यम से हादसों को नहीं रोका जा सकता। कई श्रद्धालु इसका पालन ही नहीं करते।

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