अफसरों का दखल : 3 दिन बाद इंदौर के ट्रांसपोर्टर का ट्रक रवाना

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। लेनदेन के विवाद में सुदामानगर में तीन से खड़ा लोडिंग ट्रक पुलिस के बड़े अफसरों के दखल के बाद शुक्रवार को इंदौर रवाना हो गया। हालांकि शिकायतकर्ता लोकेश चौधरी ने ट्रक से सामान ले जाने वाली प्रेरणा मेहता के भाई प्रतीक पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया है।
दरअसल, 111 सुदामानगर की रहने वाली प्रेरणा मेहता इंदौर में हॉस्टल में रहकर नेट की तैयारी कर रही हैं। उनकी मां रक्षा मेहता और पिता रमेशचंद्र ने सुदामानगर का मकान प्रापर्टी और कपड़ा कारोबारी शशांक शर्मा और शुभम शर्मा को बेच दिया है। घर का सामान ले जाने के लिए प्रेरणा मेहता ने शुभम शर्मा के मार्फत इंदौर के न्यू यूनिक पैकर्स एवं मूवर्स को बुक किया था। कंपनी ने कर्मचारियों की मदद से सामान पैक कर इसे ट्रक (एमएच 18 एए 8230) में लोड किया था।
बुधवार दोपहर 3 बजे जब ट्रक रवाना होने ही वाला था कि चिमनगंज मंडी थाने से आरक्षक रवि पटेल और देवासगेट थाने से आरक्षक प्रफुल्ला शुक्ला पहुंचे थे। इन दोनों ने ड्राइवर से ट्रक की चाबी छीन ली थी और मकान पर अपना ताला जड़ दिया था। आरक्षकों का कहना था कि प्रेरणा के भाई प्रतीक ने लोकेश चौधरी के साथ जालसाजी की है। उससे 1.10 करोड़ रुपए लिए हैं। इसलिए सामान नहीं ले जा सकते। ट्रक रुकवाने के मामले में प्रेरणा मेहता ने पुलिस अफसरों को आवेदन दिया था। दो दिन तक इसे लेकर मशक्कत चलती रही। अक्षरविश्व में शुक्रवार को खबर प्रकाशित होने के बाद पुलिस अफसरों ने दखल दिया और ट्रक शुक्रवार दोपहर रवाना करवाया। न्यू यूनिक पैकर्स एवं मूवर्स के संचालक योगेंद्र कुमार ने बताया कि ट्रक इंदौर पहुंच गया है। पार्टी से एडवांस मिलते ही डिलिवरी कर दी जाएगी।दोस्ती की, विश्वास जमाया और फिर रुपए हड़प लिए
इस संबंध में शिकायतकर्ता लोकेश चौधरी ने बताया कि वह पदमावती एवेन्यू में रहते हैं और प्रापर्टी का काम करते हैं। पांच साल पहले प्रतीक मेहता से एक प्लॉट के सिलसिले में मुलाकात हुई थी। फिर यह दोस्ती में बदल गई। दोनों मिलकर प्रापर्टी का काम कर रहे थे। इस बीच रुपयों का लेन-देन भी दोनों के बीच होने लगा।
चौधरी का आरोप है कि प्रतीक ने उनसे 1.10 करोड़ रुपए लिए। 15 जून को ही उसके खाते में 8 लाख रुपए ट्रांसफर किए। चौधरी का कहना है कि प्रतीक के घरवालों को कर्ज की जानकारी थी। उसके घरवालों ने सुदामानगर के मकान की रजिस्ट्री मेरे नाम करने का वादा किया था, लेकिन गुपचुप मकान बेचकर पूरा परिवार चला गया। आवेदन के बाद पुलिस ने मदद की थी और ट्रक रुकवाया था। इस संबंध में प्रतीक मेहता से बातचीत की कोशिश की लेकिन दोनों फोन बंद मिले।









