प्यासी धरती… भू-जलस्तर गिरा, तालाब भी सूखे

उज्जैन शहर में 12.76 मीटर तो जिले में 13.70 मीटर ग्राउंड वाटर लेवल
अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। ‘जल नहीं तो कल नहीं’… यह वाक्य अब धीरे-धीरे सच होता दिखाई दे रहा है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि भीषण गर्मी के दौर में शहर के भू-जलस्तर (ग्राउंड वाटर लेवल) में लगातार गिरावट आ रही है जिसने खतरे की घंटी बजा दी है। इसका खामियाजा वर्तमान में कई क्षेत्रों में लोगों को पानी के लिए परेशान होकर भुगतना पड़ रहा है।
शहर की रीढ़ माने जाने वाले स्थानीय तालाब जो कभी पानी से लबालब रहते थे, वह भी आज एक-एक बूंद के लिए तरस रहे हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि पिछले कुछ सालों में अनियंत्रित शहरीकरण, अंधाधुंध बोरिंग खनन और जलस्रोतों की अनदेखी के कारण भू-जलस्तर चिंताजनक रूप से नीचे चला गया है। यह स्थिति शहर के भविष्य के लिए भी बड़ी चेतावनी है। अब भी नहीं जागे तो आगे परिणाम और भयंकर होंगे।
डिवीजनल ग्राउंड वाटर सर्वे यूनिट 14 (विभागीय भूजल सर्वेक्षण इकाई-14) इंदौर (एमपी) के सहायक भूजल विज्ञानी शिवराज सिंह वास्केला ने बताया मई 2025 में उज्जैन शहर में औसत भू-जलस्तर 13.82 मीटर था जो मई 2026 में 12.76 मीटर पर पहुंच गया। इसमें 1.06 मीटर की गिरावट आई।
इसी तरह बडऩगर में मई 2025 में भू-जलस्तर 16.98 मीटर था जो मई 2026 में 15.41 मीटर पहुंच गया। घट्टिया में 14.74 से 13.64 मीटर, खाचरौद में 15.03 से 14.60 मीटर और तराना में भू-जलस्तर 14.80 से 13.92 मीटर पर पहुंच गया। वहीं महिदपुर में मई 2025 में भू-जलस्तर 11.83 था जो मई 2026 में 11.99 मीटर रहा। कुल मिलाकर उज्जैन जिले में औसत ग्राउंड वाटर लेवल मई 2025 में 14.45 के मुकाबले मई 2026 में 13.70 मीटर रहा।
तालाबों की वर्तमान स्थिति
लोक सरोवर : साइंस कॉलेज परिसर में बना लोक सरोवर वर्ष 2024 में बनकर तैयार हुआ था। यह तालाब गर्मी के कारण सूखा पड़ा है। पिछले मानसून में इसमें पानी जमा हुआ था लेकिन वर्षाकाल बीतते ही यह सूख गया। यदि इसमें पूरे साल पानी रहे तो आसपास के क्षेत्र में भू-जलस्तर नीचे नहीं जाएगा।
विक्रम सरोवर: देवास रोड स्थित विक्रम सरोवर वर्ष 2007 में सम्राट विक्रमादित्य विवि के पूर्व कुलपति प्रो. रामराजेश मिश्र के कार्यकाल में बना था जो अब सूख है। इसमें पहले कमल खिला करते थे व लोग टहलने आते थे। पिकनिक के लिए अच्छी जगह थी लेकिन वर्तमान में यहां सौंदर्यीकरण का काम चल रहा है।
श्रमतीर्थ पुलिस लाइन तालाब : देवास रोड पर पुलिस लाइन स्थित तालाब तत्कालीन एसपी मनमीत सिंह नारंग के कार्यकाल में बना था लेकिन अब इसकी भी हालत खराब हो गई है। वर्तमान में इसमें भी पानी काफी कम है। वर्तमान में इसमें कचरा भी फेंका जा रहा है जिससे स्थिति खराब हो रही है।
समस्या
खेती, घरेलू और औद्योगिक कामों के लिए पिछले कुछ सालों में उज्जैन सहित जिले में अंधाधुंध बोरवेल खोदे गए हैं।
सोयाबीन, गेहूं, चने जैसी फसलों के लिए किसान भूजल पर निर्भर हैं जिससे पानी रिचार्ज होने की तुलना में ज्यादा निकाला जा रहा है।
सड़कों, मकानों व व्यावसायिक निर्माण के चलते जमीन कांक्रीट से ढंक चुकी है। इससे बारिश का पानी जमीन में नहीं जाता और बहकर बर्बाद होता है।
शहर में प्राकृतिक रूप से भूजल को रिचार्ज करने वाले कुएं, बावडिय़ां व तालाब देखरेख के अभाव, अतिक्रमण और कचरा फेंकने से या तो सूख गए हैं या बंद हो चुके हैं।
समाधान
रैन वॉटर हार्वेस्टिंग : घरों व सरकारी इमारतों में रैन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम हो। वर्तमान में शहर के करीब 80 प्रतिशत घरों, इमारतों, दुकान, प्रतिष्ठानों में यह सिस्टम नहीं है।
तालाबों और बावडिय़ों का पुनरुद्धार : पुराने जलस्रोतों को साफ कर उन्हें दोबारा जीवित किया जाए।
ड्रिप इरिगेशन : किसानों को कम पानी वाली फसलों और आधुनिक सिंचाई तकनीक जैसे ड्रिप इरिगेशन (टपक सिंचाई) को अपनाने केलिए प्रेरित किया जाए।
विशेषज्ञ कॉर्नर
विकास को तो रोका नहीं जा सकता लेकिन ईको फ्रेंडली डेवलपमेंट किया जा सकता है। सभी बिल्डिंग पर रैन वाटर हार्वेस्टिंग लगाए जाएं ताकि बारिश का पानी जमीन के अंदर जा सके। इसके अलावा शहर की हर कॉलोनी के पानी को एकत्रित किया जाए। उस पानी को बगीचे में रिचार्ज पीट बनाकर उसमें उतारा जाए जिससे पूरी कॉलोनी का जलस्तर बढ़ेगा और सालभर बोरिंग और कुएं भी पानी से लबालब रहेंगे। इस तरह के आसान तरीकों से भू-जलस्तर बढ़ाने के प्रयास किए जा सकते हैं।
– डॉ. हरीश व्यास, प्राचार्य, साइंस कॉलेज एवं पर्यावरणविद्









