दादूराम आश्रम के महामंडलेश्वर ज्ञानदास पर दुष्कर्म का केस दर्ज

एसपी को मिले आवेदन, युवती के बयान और मेडिकल के बाद एक्शन
उज्जैन। दादूराम आश्रम के महामंडलेश्वर ज्ञानदास पर आखिरकार पुलिस ने दुष्कर्म की एफआईआर दर्ज कर ली। पीडि़त महिला के आवेदन की जांच शुक्रवार रात उस वक्त पूरी हुई, जब उसके बयान और मेडिकल में रेप की पुष्टि हो गई। ऐसे में पांच दिन से चल रहे ड्रामे का पटाक्षेप हो गया। टीआई गगन बादल ने बताया कि महिला के बयानों और मेडिकल के बाद ज्ञानदास के खिलाफ दुष्कर्म सहित अन्य धाराओं में प्रकरण दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
दरअसल, सदावल मार्ग स्थित दादूदयाल आश्रम के महामंडलेश्वर ज्ञानदास पर एक महिला ने दुष्कर्म का आरोप लगाया था। उसने एसपी ऑफिस में आवेदन देकर ज्ञानदास महाराज के खिलाफ आवेदन दिया था। आवेदन में नौकरी दिलाने के बहाने नशीला पदार्थ खिलाकर दुष्कर्म करने, धमकाने, फोटो-वीडियो बनाने और गर्भवती करने जैसे संगीन आरोप लगाए गए थे।
महाकाल थाने की एसआई नेहासिंह मामले की जांच कर रही थी। महिला के आवेदन पर ज्ञानदास ने सफाई दी थी और खुद को हनीट्रैप में फंसाने का हवाला दिया था। हालांकि वह अपने समर्थन में कोई भी सबूत नहीं दे सका था। उसके उल्टा महिला ने ज्ञानदास के साथ वाटसएप पर हुई चैट वायरल कर दी थी, जिसमें गर्भपात कराने के लिए डॉक्टर के पास चलने का हवाला दिया गया था। इतना ही नहीं ज्ञानदास इस चैट में गर्भधारण को ठीक भी बता रहा था।
पुलिस ने दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए थे। पीडि़त महिला ने शुक्रवार की शाम महाकाल थाने में बयान दर्ज कराए। उसने सबूत भी दिए। महिला का मेडिकल भी कराया गया, इसमें दुष्कर्म की पुष्टि होने पर प्रकरण दर्ज कर लिया गया। इस संबंध में ज्ञानदास से संपर्क करने के लिए मोबाइल पर संपर्क किया लेकिन वह स्विच ऑफ मिला।
प्यार, गुप्त शादी और धोखा
युवती ने पुलिस को दिये आवेदन में लिखा था कि ज्ञानदास ने उससे नौकरी के बहाने नजदीकियां बढ़ाई। प्यार जताया। दुष्कर्म किया। आश्रम में ही गुप्त विवाह भी किया जिसके फोटो वीडियो बनवाए। गर्भवती होने पर गर्भपात भी करवाया व धमकी दी थी। ज्ञानदास का कहना था कि महिला द्वारा ब्लैकमेल किया गया। उसे कई बार रुपये दिये। उसके द्वारा आश्रम अपने नाम करने या 25 लाख रुपए देने की मांग की जा रही थी। महिला द्वारा पुलिस को शिकायत से पहले मैंने थाने में उसके खिलाफ हनीट्रैप और ब्लैकमेलिंग की शिकायत की थी।









