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भस्मार्ती टिकट बेचने वाला हिरासत में, मुख्य आरोपी की अब भी तलाश

बड़े रैकेट का खुलासा होने की संभावना

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पहले भी पकड़ में आ चुके हैं मामले

कतार में खड़े दर्शनार्थियों के बीच जाकर मंदिर प्रशासक ने पकड़ी थी बदमाशी, 3 श्रद्धालुओं से लिए थे 7500 रुपए

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। श्री महाकालेश्वर मंदिर में बाहर से आने वाले दर्शनार्थियों को बरगलाकर भस्मार्ती परमिशन के नाम पर अवैध वसूली करने के मामले मेें महाकाल पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। अनुमति बनवानेे वाले मुख्य आरोपी की तलाश में पुलिस जुटी है। ताजा मामला शुक्रवार आधी रात का है, जहां तीन श्रद्धालुओं से 2500 रुपए प्रति व्यक्ति के हिसाब से 7500 रुपए लेकर भस्मार्ती दर्शन अनुमति बनवाई गई थी। इस बात का खुलासा तब हुआ जब मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक खुद आधी रात को औचक निरीक्षण करने मंदिर में पहुंच गए और दर्शनार्थियों से बात की। प्रशासक एवं अपर कलेक्टर प्रथम कौशिक शुक्रवार रात करीब डेढ़ बजे नीलकंठ द्वार से मानसरोवर होते हुए गेट नंबर १ पर पहुंचे। उन्होंने जब कतार में खड़े श्रद्धालुओं से अनुमति पत्र और उसके लिए चुकाई गई राशि के बारे में पूछताछ शुरू की तो कतार में लगे दिल्ली के तीन युवक पार्थ, प्रत्युश और रजत ने बताया कि उन्होंने ७५०० रुपए देकर तीन लोगों की भस्मार्ती अनुमति बनवाई है।

पूछताछ में सामने आए दो नाम
श्रद्धालुओं ने प्रशासक को बताया कि हर्षित जैन ने उनसे फोन पर संपर्क कर 2500 रुपए प्रति व्यक्ति भस्मार्ती की कन्फर्म परमिशन दिलाने की बात की। हर्षित ने तीनों युवकों को अवंतिका गेट पर आने का कहा। वहां उसके अटेंडर रजत शर्मा ने उन्हें टिकट सौंपे।

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तुरंत बनवाया शिकायती लेटर

मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासक ने तुरंत तीनों युवकों से एक लिखित आवेदन बनवाया। इसके बाद मंदिर के सुरक्षा अधिकारी दिलीप बामनिया की ओर से महाकाल थाने में मामला दर्ज कराया गया। महाकाल थाना प्रभारी गगन बादल ने बताया कि आरोपी हर्षित जैन और रजत शर्मा के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। रजत शर्मा पुलिस की हिरासत में आ चुका है। महाकाल पुलिस जल्दी ही इस पूरे मामले का खुलासा करेगी।

बिचौलियों से सावधान रहें
भस्मार्ती के लिए केवल अधिकृत माध्यमों (मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट) से ही अनुमति प्राप्त करें। निर्धारित शुल्क से अधिक राशि का भुगतान किसी को न करें और किसी भी प्रकार के बिचौलियों या फर्जी एजेंटों के झांसे में न आएं।
– आशीष फलवाडिय़ा, सहायक प्रशासक

इस तरह खुला राज हिंदूवादी संगठन के नाम का भी दुरुपयोग

सूत्रों के मुताबिक पिछले दिनों जब मंदिर समिति से जुड़ी केएसएस कंपनी के पूर्व कम्प्यूटर ऑपरेटर ने मुंबई की एक महिला से 4250 रुपए भस्मार्ती के नाम पर ठगे थे। तब से ही मंदिर समिति प्रशासक भस्मार्ती के नाम पर चल रही बदमाशी रंगे हाथों पकडऩे की फिराक में थे। शुक्रवार रात उन्होंने कतार में खड़े बाहरी दर्शनार्थियों से जब भस्मार्ती दर्शन अनुमति बनवाने का तरीका जाना तो मामला सामने आ गया। इससे भस्मार्ती में ड्यूटी दे रहे कर्मचारियों में भी हड़कंप गई। सूत्रों के मुताबिक भस्मार्ती अनुमति एक हिंदूवादी संगठन के प्रोटोकॉल पर बनी थी।

पुजारियों से भी जुड़ा है रजत शर्मा हर्षित बनवाता था अनुमति

मामले में आरोपी रजत शर्मा पीपलीनाका क्षेत्र के ज्ञान टेकरी पर रहता है। पुलिस को रजत ने बताया कि वो भस्मार्ती के लिए दर्शनार्थी लाकर हर्षित को सौंपता था और अनुमति बनने के बाद सुबह अनुमति लेकर गेट तक श्रद्धालुओं को छोड़ता था। रुपए का लेनदेन हर्षित करता था। सूत्रों के मुताबिक रजत मंदिर के पुजारियों के भी संपर्क में है।

अब रोज पूछताछ, गड़बड़ी करने वालों की खैर नहीं

मंदिर समिति के अधिकारी अब रोज भस्मार्ती के पहले मानसरोवर सहित अन्य गेट पर दर्शनार्थी से पूछताछ करेंगे कि उन्होंने भस्मार्ती अनुमति कैसे बनवाई और कितने रुपए दिए। खासकर बाहर से आने वाले दर्शनार्थियों से यह जरूर जाना जाएगा कि प्रोटोकॉल अनुमति उन्हें किस की मदद से मिली। ऐसे में ज्यादा रुपए लेकर अनुमति कराने की गड़बड़ी रात में ही पकड़ में आ जाएगी।

प्रोटोकाल से हो रहा भस्मार्ती का व्यापार

अभी तक जितने भी मामले भस्मार्ती दर्शन अनुमति के सामने आए हैं, उनमें अनुमति प्रोटोकॉल के जरिए बनी है। मंदिर समिति द्वारा जनप्रतिनिधि, मीडिया, शासकीय कार्यालय, पंडे-पुजारी, राजनीतिक संगठनों आदि को भस्मार्ती अनुमति की अनुशंसा के विशेष अधिकार दिए हैं। प्रोटोकॉल सुविधा का दुरुपयोग भी बढ़ा और गैरजरूरी संगठन भी सांठगांठ कर इसका लाभ लेने लगे। हालांकि, पिछले कुछ महीनों में इस पर अंकुश लगा है, फिर भी कुछ लोग मौके का फायदा उठा रहे हैं।

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