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शहर के जैन मंदिर..श्री आदिनाथ मंदिर, ऋषिनगर

श्री आदिनाथ मंदिर, ऋषिनगर

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पुण्य गर्भा भाव भूमि उज्जयिनी में स्थापित जिन मंदिरों की हम वंदना कर रहे है। चलिए आज दर्शन करते हैं इंदौर देवास रोड के मध्य स्थित ऋषि नगर कॉलोनी में निर्मित तीन मंजिल उतंग श्री आदिनाथ मंदिर के। जैन समाज के अथक प्रयास से मंदिर हेतु भूमि उपलब्ध कराई गई और प्रारंभ से ही विशाल मंदिर की कल्पना से मंदिर निर्माण का कार्य प्रारंभ हुआ। पूर्णता तब हुई जब भारत वर्ष के प्रसिद्ध आचार्य 108 विशुद्ध सागर जी महाराज के मंगल सानिध्य में अप्रैल 2010 में अति भव्य पंचकल्याण प्रतिष्ठा महोत्सव के साथ वीतराग भाव धरनी आदिनाथ भगवान के साथ अन्य जिन प्रतिमा विराजित की गई उज्जैन के लिए यह मंदिर अत्यंत उत्तम एवं वंदनीय के साथ आकर्षित रूप में सुसज्जित किया गया है.

इसके मध्यतल में भगवान पाश्र्वनाथ स्वामी के साथ ही 24 भगवान की प्रतिमाएं विराजित की गई। कुछ समय पूर्व ही 105 पूर्णमति माताजी के मंगल सानिध्य में विशाल शिखर पर स्वर्ण कलश चढ़ाया गया। यहां पर 11 जिन प्रतिमा स्थापित है। मंदिर के आसपास बसी 20 कॉलोनी के जैन धर्म अनुयाई इस मंदिर में नियमित पूजा पाठ अर्चना करते हैं।

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इस मंदिर में स्थापना से ही निशुल्क औषधालय का संचालन किया जाता है। मंदिर परिसर में ही विशाल संत निवास है जहां वर्तमान में 108 मुनि श्री सुप्रभ सागर जी एवं प्रणत सागर जी का चार्तुमास चल रहा है। इस मंदिर मेंआदिनाथ महिला मंडल, आदिनाथ बाल मंडल, युवा मंडल अत्यंत सक्रियता से धार्मिक अनुष्ठान करते रहते हैं। मंदिर की व्यवस्था श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर ट्रस्ट ऋषि नगर द्वारा की जाती है।

श्री सुमतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर

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शहर के जिन मंदिरों की वंदना के क्रम में आज चलते हैं इंदिरा नगर स्थित 1008 श्री सुमति नाथ दिगंबर जैन मंदिरकी ओर इस मंदिर की स्थापना सन 1991-92 में 108 सन्मति सागर जी महाराज की प्रेरणा से 108 योगेंद्र सागर जी महाराज के सानिध्य में संपन्न हुई थी। इस जैन मंदिर के निर्माण हेतु श्री भगवानदास, रमेशचन्द, संतोष कुमार (दर्पण श्रृंगार परिवार) ने अपना भवन पवित्र भाव से प्रदत्त किया था।

यहां के निवासियों की भावना और बढ़ती हुई संख्या ने मंदिर के विस्तार की योजना बनाई और सन 2015 में भव्य वेदी प्रतिष्ठा पूर्वक 108 श्री वीर सागर जी महाराज जी के मंगल सानिध्य में भगवान विराजमान हुए। यहां प्रतिदिन अभिषेक पूजन का क्रम नियमित रहता है। वर्ष में एक बार मूल नायक सुमति नाथ भगवान के सभी कल्याणक पूरे उत्साह के साथ सम्पूर्ण समाज की उपस्थिति में मनाया जाता है।

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