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कान्ह का गंदा पानी शिप्रा में मिलने से रोकने का एक और नया प्लान

कान्ह का गंदा पानी शिप्रा में मिलने से रोकने का एक और नया प्लान

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उज्जैन।सिंहस्थ 2028 के पहले कान्ह नदी का गंदा पानी शिप्रा में मिलने से रोकने के लिए राज्य सरकार एक और नया प्लान तैयार किया है। प्रदेश केबिनेट ने 598 करोड़ रु. की लागत परियोजना को मंजूरी दी है। इसके बाद अब प्रशासकीय स्वीकृति और टेंडर प्रक्रिया होगी।

शिप्रा की स्वच्छता व प्रदूषण से बचाने के लिए अब कान्ह नदी पर अंडर ग्राउंड नहर (क्लोज डक्ट) बनाई जाएगी। शिप्रा को कान्ह के प्रदूषण से बचाने के लिए जल संसाधन विभाग द्वारा बनाई गई कान्ह डायवर्सन क्लोज डक्ट परियोजना को राज्य मंत्री परिषद् ने मंजूरी दे दी है। परियोजना को सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखकर स्वीकृत किया है।

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शिप्रा शुद्धिकरण के लिए दो दशकों में कई योजनाएं…

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बता दें कि बीते दो दशकों में सरकार शिप्रा शुद्धी के लिए विभिन्न योजनाओं पर 800 करोड रुपए से अधिक खर्च कर चुकी है, बावजूद शिप्रा स्वच्छ नहीं हो पाई है। अभी भी शिप्रा में इंदौर और उज्जैन का दूषित जल बगैर उपचार के मिल रहा है।

क्लोज डक्ट योजना, सिंहस्थ -2052 के वक्त इंदौर शहर एवं सांवेर की आबादी और सीवरेज को ध्यान में रख तैयार की है। कान्ह के पानी को शिप्रा में मिलने से रोकने के लिए सिंहस्थ 2016 में 80 करोड़ रुपए से पाइप लाइन डाली गई थी।

इससे खान का 5 क्यूसेक पानी डाइवर्ट हो रहा था। यह पाइप लाइन राघौ पिपलिया स्टापडेम से कालियादेह तक डाली थी। योजना चालू होने के कुछ समय बाद ही जगह-जगह पाइप धंस जाने से पूरा पानी डायवर्ट नहीं हो रहा। ओवर फ्लो होकर त्रिवेणी पर शिप्रा में मिल रहा है।

पांच महीनों पहले बनी थी डीपीआर

शिप्रा को कान्ह के प्रदूषण से बचाने की स्थायी व्यवस्था के लिए जल संसाधन विभाग ने आरसीसी बाक्स आधारित कान्ह डायवर्सन क्लोज डक्ट परियोजना की डीपीआर पांच माह पहले भोपाल भोपाल प्रेषित की थी। उम्मीद है सिंहस्थ के पहले योजना को पूरा कर लिया जाएगा। इससे शिप्रा को कान्ह के प्रदूषण से बचाने का स्थायी समाधान होगा।

योजना को 30 साल की अनुमानित जनसंख्या को ध्यान में रखकर बनाया

कान्ह डायवर्सन क्लोज डक्ट (अंडर ग्राउंड) नहर परियोजना को 30 साल की अनुमानित जनसंख्या को ध्यान में रखकर बनाया है। कान्ह नदी में इंदौर से औद्योगिक क्षेत्र का प्रदूषित पानी आता है। क्लोज डक्ट योजना से पर्यावरण और जनस्वास्थ्य को नुकसान भी नहीं है। खर्च भी कम है। 30 साल बाद सिंहस्थ-2052 के वक्त इंदौर-सांवेर शहर की जनसंख्या लगभग 81 लाख 52 हजार 661 हो जाएगी। तब मौजूदा 30 क्यूमेक सीवरेज जल उद्वहन होगा।

गोठड़ा गांव में कान्ह पर स्टापडैम

कान्ह को त्रिवेणी संगम से डायवर्ट करेंगे

त्रिवेणी घाट के पास गोठड़ा गांव में कान्ह नदी पर पांच मीटर ऊंचा स्टापडैम बनाया जाएगा।

स्टापडेम से कालियादेह तक क्लोज डक्ट (अंडर ग्राउंड) नहर बनाई जाएगी।

कान्ह का पानी नहर से होकर कालियादेह पर शिप्रा में छोड़ा जाएगा।

नहर की लंबाई 16.7 किमी और चौड़ाई 4.5 मीटर अंग्रेजी अक्षर डी के आकार की होगी।

4.5 मीटर आयताकार आरसीसी बॉक्स के आकार की नहर में आगे 100 मीटर और आखिरी में 100 मीटर का हिस्सा खुला रहेगा।

नहर की सफाई का प्रावधान भी किया है, इसमें भीतर तक की सफाई हो सकेंगी।

नहर से 40 क्यूसेक पानी (बारिश को छोड़कर) डाइवर्ट किया जाएगा।

यह 3 साल में पूरी हो जाएगी। इसके बाद कान्ह का गंदा पानी त्रिवेणी पर शिप्रा में नहीं आएगा।

निर्माण करने वाली एजेंसी 15 साल तक इसका रखरखाव करेगी। नहर के संचालन में कोई भी गड़बड़ी होने पर एजेंसी को सुधार करना होगा।

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