दिल्ली की तरह हमारी होटलें भी असुरक्षित, 80% मेें फायर सेफ्टी ही नहीं

नगर निगम ने रेलवे स्टेशन क्षेत्र की कई होटलों को खंगाला, इमरजेंसी एग्जिट भी नहीं, 30 तक फायर ऑडिट का अल्टीमेटम
अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। पिछले दिनों दिल्ली की होटल में हुए भीषण अग्निकांड से सबक लेते हुए नगर निगम ने शहर के होटलों में अग्नि सुरक्षा (फायर सेफ्टी) जांच शुरू कर दी है। जिसमें चौंकाने वाली बात यह है कि हमारे शहर की 80 प्रतिशत होटलों में फायर सेफ्टी के इंतजाम नाकाफी हैं। अगर यहां आग लगने की घटना होती है तो मौके पर ऐसे कोई साधन नहीं हैं जिनसे तुरंत काबू पाया जा सके। श्री महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले देश-विदेश के अधिकांश श्रद्धालु होटलों में ही ठहरते हैं। ऐसे में यहां फायर सेफ्टी के इंतजाम होना बहुत जरूरी है। मंगलवार शाम को रेलवे स्टेशन क्षेत्र स्थित होटलों पर फायर ऑफिसर लक्ष्मणप्रसाद साहू ने औचक निरीक्षण किया और सुरक्षा उपकरणों व कागजों की बारीकी से जांच की। टीम ने मौके पर होटलों में लगे अग्निशमन यंत्रों (फायर एक्स्टिंगग्विशर), आपातकालीन रास्तों और सबसे महत्वपूर्ण फायर एनओसी के दस्तावेजों को बारीकी से खंगाला।
पिछला रास्ता नहीं होने पर अटकी जांच, कैसे पहुंचेगी फायर ब्रिगेड
चैकिंग में चिंताजनक बात यह सामने आई कि कई होटलों के पीछे न तो कोई रास्ता है और न ही कोई गली। ऐसे में यदि होटल के पिछले हिस्से में आग लगती है तो वहां फायर ब्रिगेड का पहुंचना नामुमकिन होगा। अधिकारियों ने इस बिंदु को बेहद गंभीरता से लिया है।
भवन अनुज्ञा और बिजली सुरक्षा संबंधी दस्तावेज भी देखे
निगम की टीम ने स्टेशन क्षेत्र के होटल गुजरात पैलेस, होटल विराज, होटल कलश, होटल शिव महिमा, होटल आमंत्रण, होटल ड्रीम पैलेस, होटल आमंत्रण एवेन्यू, होटल रॉयल व्यू और होटल एटलस सहित कई बड़े प्रतिष्ठानों पर पहुंची। अधिकारियों ने फायर एनओसी के साथ-साथ भवन निर्माण की अनुमति (भवन अनुज्ञा) और विद्युत सुरक्षा प्रमाण पत्रों को भी चैक किया।
अभियान जारी रहेगा, 30 जून तक रिपोर्ट मांगी
फायर ऑफिसर साहू ने बताया कि सभी होटल संचालकों को स्पष्ट हिदायत दी है कि केवल फायर एनओसी होना ही काफी नहीं है, बल्कि उन्हें हर साल अपनी वार्षिक अग्निशमन ऑडिट रिपोर्ट भी जमा करनी होगी। इसके लिए 30 जून तक का समय तय किया गया है जिसके भीतर रिपोर्ट सौंपना अनिवार्य है। साहू ने बताया कि होटलों का चैकिंग अभियान लगातार जारी रहेगा। रेलवे स्टेशन क्षेत्र के बाद महाकाल मंदिर क्षेत्र, नानाखेड़ा बस स्टैंड क्षेत्र और फ्रीगंज इलाके मेें भी टीम लगातार जांच करेगी।
बड़ी होटलों के लिए कड़े नियम
नियमानुसार 15 मीटर से ज्यादा ऊंचे भवनों, एक फ्लोर पर 500 वर्गमीटर से बड़े कवर्ड एरिया वाले निर्माण, ५० बेड वाले बड़े होटल, अस्पताल, शॉपिंग मॉल, मल्टीप्लेक्स, सिनेमा हॉल और मैरिज गार्डनों के लिए फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य है। इसके लिए फायर अलार्म, स्मोक डिटेक्टर सिस्टम, पानी की बौछार करने वाले स्प्रिंकलर और हाइड्रेंट सिस्टम, आपातकालीन निकास मार्ग (इमरजेंसी एग्जिट) और लाइटिंग की व्यवस्था वहां होना चाहिए। फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट सिर्फ 3 वर्ष के लिए मान्य होता है। इसकी अवधि खत्म होने से 2 महीने पहले ही रिन्युअल (नवीनीकरण) के लिए आवेदन करना जरूरी है। वहीं 50 से कम बिस्तरों वाले छोटे होटल व अस्पतालों को पंजीकृत फायर इंजीनियर का प्रमाणीकरण देना होगा। बड़े प्रतिष्ठानों में कमियां मिलने पर नगर निगम उस पर कड़ी कार्रवाई कर सकता है, जबकि छोटे प्रतिष्ठानों को फायर सेफ्टी के इंतजाम पुख्ता करने के लिए नोटिस के नियम हैं।
नगर निगम ने सभी से मांगे यह दस्तावेज
अग्निशामक सिलेंडरों की उपलब्धता व एक्सपायरी डेट।
बिजली की वायरिंग और विद्युत सुरक्षा (व्यवस्था विद्युत सुरक्षा प्रमाण पत्र)।
स्टाफ को आग से निपटने की ट्रेनिंग (मॉक ड्रिल)।
फायर सेफ्टी प्रमाण पत्र (फायर एनओसी)
भवन अनुज्ञा
वार्षिक अग्निशमन ऑडिट रिपोर्ट
शहर में स्थिति- करीब 500 से अधिक होटलें
बड़े होटल या अस्पताल (50 बेड से अधिक)- 100 से ज्यादा।
छोटे होटल या अस्पताल (50 बेड से कम)- 400 से ज्यादा।









