9.6 किमी का सफर तय कर पहले पड़ाव पर पहुंचे श्रद्धालु

शिप्रा परिक्रमा : जल संवर्धन के लिए दो दिन में 40 किलोमीटर चलेंगे 5 हजार यात्री
आज शाम गुरुनानक घाट पर विश्राम, दत्त अखाड़ा घाट पर भजन संध्या
अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। जल है तो कल है का ध्येय लेकर करीब 5 हजार श्रद्धालु मां शिप्रा की परिक्रमा पर सोमवार को निकल पड़े। दो दिन में यह तीन पड़ाव पर रुकते-ठहरते हुए 40 किलोमीटर का सफर तय करेंगे। 24 साल पहले शुरू हुई यात्रा में कई ऐसे श्रद्धालु भी हैं जिन्होंने एक भी यात्रा खाली नहीं छोड़ी। वह हर यात्रा में शरीक हुए और शिप्रा और जल के प्रति अपने कर्तव्य का निर्वहन किया। इस बार की शिप्रा परिक्रमा इस मायने में और खास है कि यह नौतपा के पहले दिन शुरू हो रही है। हालांकि, मौसम का मिजाज आज नरम है और मानसून पूर्व की हवाएं चलने से दिन का तापमान 41.5 डिग्री के आसपास है।
दो दिनी शिप्रा परिक्रमा यात्रा का शुभारंभ यूं तो सुबह 8 बजे रामघाट से होना था लेकिन अतिथियों के आगमन में देरी से यात्रा सुबह 10.15 बजे शुरू हुई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के पुत्र वैभव यादव, उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. रवींद्र सोलंकी (रवि सोलंकी), रामादल अध्यक्ष डॉ. रामेश्वरदास और ऋणमुक्तेश्वर महादेव मंदिर के गादीपति महावीरनाथ ने पूजन किया।
केसरिया पताका हाथों में थामकर यात्रियों ने मां शिप्रा और जय महाकाल का जयकारा लगाकर पैदल चलना शुरू किया। रामघाट, नृसिंहघाट से होते हुए यात्री जोशीले नारे लगाते हुए आगे बढ़ते रहे। इस बीच प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल भी मौके पर पहुंचे। इससे पहले यात्रियों का रजिस्ट्रेशन किया गया। बड़ी संख्या में लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराया। पहले दौर में करीब 9.6 किलोमीटर की यात्रा तय श्रद्धालु पहले पड़ाव त्रिवेणी घाट पहुंचे। यह भोजन से पहले भजन-कीर्तन का दौर चला। दोपहर ३ बजे यात्री अगले पड़ाव गुरुनानक घाट के लिए रवाना होंगे। यहां रात्रि विश्राम होगा। शाम ६ बजे श्रेयश शुक्ला, संजो बघेल की भजन संध्या दत्त अखाड़ा घाट पर होगी।
आगे क्या
गुरुनानक घाट पर भोजन और रात्रि विश्राम।
मंगलवार सुबह 6 बजे अगले पड़ाव के लिए रवानगी।
मंगलवार दोपहर वाल्मीकि घाट पर भोजन और विश्राम
दोपहर 3 बजे रामघाट के लिए रवानगी
शाम 7.30 बजे भजन जैमिंग, रात 8.30 बजे मैथिली ठाकुर की भजन संध्या
किसने क्या कहा
हर साल यात्रा पर जाता हूं। जल का महत्व समझाने के लिए यह यात्रा शुरू की गई थी। शिप्रा को लेकर लोगों में यात्रा के जरिए चेतना आई है।
-डॉ. रवींद्र सोलंकी
अध्यक्ष, उज्जैन विकास प्राधिकरण
24 साल में यात्रा कहां से कहां पहुंच गई। यात्रा से मां शिप्रा के प्रति जनचेतना जागृत हुई है। मुझे भी आत्मिक अनुभूति होती है।
-राजेशसिंह कुशवाह, सीनेट मेंबर सम्राट विक्रमादित्य विवि
हर साल यात्रा अपना स्वरूप बदल रही है। २४ साल में यह बहुत बड़ी हो गई है। सीएम डॉ. मोहन यादव का संकल्प जमीन पर उतर रहा है।
संजय अग्रवाल
भाजपा नगर अध्यक्ष
24 वीं बार यात्रा पर निकल रहा हूं। 24साल पहले जब यात्रा शुरू हुई थी तब कारवां छोटा था, अब हर साल सैकड़ों नए लोग जुड़ रहे हैं।
नरेश शर्मा, समाजसेवी
यात्रा में शामिल होकर आध्यात्मिक अनुभूति होती है। यह प्रकृति के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने का माध्यम है।
डॉ रमन सोलंकी, पुरातत्वविद्
सीनेट मेंबर, सम्राट विक्रमविवि









