9 घंटे बाइक पर लाश लेकर भटकते रहे परिजन, पुलिस बोली- ‘अब तुम जानो तुम्हारा काम’

शहर के बाणगंगा क्षेत्र का शर्मनाक वाकया… करंट से युवक की मौत के बाद घंटों तक मर्ग कायम करने को तैयार नहीं थी पुलिस
अक्षरविश्व न्यूज इंदौर। शहर को स्वच्छता में नंबर-1 बनाने वाले सिस्टम की संवेदनहीनता ने मानवता को शर्मसार कर दिया। करंट लगने से दम तोडऩे वाले 21 साल के एक नौजवान की लाश को उसके परिजन 9 घंटे तक बाइक पर लादकर सडक़ों पर भटकते रहे। जिस पुलिस पर सुरक्षा का जिम्मा है, उसके गैर-जिम्मेदाराना जवाब ने जख्मों पर नमक छिडक़ने का काम किया। पुलिस की दलील थी… शव ले गए तो अब तुम जानो तुम्हारा काम। अगले दिन जब अस्पताल में भारी हंगामा हुआ, तब कहीं जाकर खाकी की नींद खुली और कागजी कार्रवाई शुरू हुई।
अलवासा निवासी अंकित (21) को काम के दौरान करंट लगा। बदहवास परिजन उसे अरबिंदो अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिजन सदमे में थे, उन्हें लगा अंकित शायद जीवित हो। वे बिना पोस्टमॉर्टम कराए उसे इलाज के लिए दूसरे अस्पताल ले जाने लगे। नियमों के मुताबिक, ऐसे मामलों में पुलिस की मौजूदगी अनिवार्य है, लेकिन बाणगंगा पुलिस ने मौके पर आने के बजाय पल्ला झाड़ लिया।
अस्पताल प्रबंधन ने दावा किया है कि उन्होंने बाणगंगा थाना प्रभारी और हेड कांस्टेबल को फोन लगाया, लेकिन वहां से कोई मदद नहीं मिली। पुलिसकर्मी ने फोन पर स्पष्ट कह दिया कि अब तुम जानो और परिजन जानें। एक तरफ मौत का गम और दूसरी तरफ पुलिसिया बेरुखी। परिजन अंकित के शव को बाइक पर बीच में बिठाकर करीब 25 किलोमीटर तक शहर की सडक़ों पर भटकते रहे। वे उसे सांवेर के जैन अस्पताल ले गए, जहां फिर से मौत की पुष्टि हुई। वहां की पुलिस ने मामला बाणगंगा क्षेत्र का बताकर हाथ खड़े कर दिए। रात 9 बजे तक परिजन न्याय और मदद के लिए सडक़ों पर भटकते रहे, लेकिन किसी ने उनकी सुध नहीं ली। अंत में थक-हारकर शव को वापस अरबिंदो की मर्चुरी में रखवाया गया।
जब पुलिस ने फिर से टालमटोल की, तो परिजन का सब्र जवाब दे गया। अस्पताल परिसर में जमकर नारेबाजी और हंगामा हुआ। मामला बढ़ता देख पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे और पंचनामा बनाकर पोस्टमॉर्टम कराया गया। मृतक का अंतिम संस्कार तो हो गया, लेकिन पीछे छोड़ गया सिस्टम की संवेदनहीनता के गहरे घाव।
जांच का आश्वासन, साख पर सवाल
अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (जोन-3) रामस्नेही मिश्रा ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि अगर पुलिस स्तर पर लापरवाही हुई है, तो दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। हालांकि, अस्पताल ने पुलिस के साथ हुई बदसलूकी और लापरवाही की रिकॉर्डिंग होने का भी दावा किया है। इस पूरी घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि आपात स्थिति में आम आदमी आज भी सिस्टम के रहमोकरम पर ही है।









