उज्जैन:प्रो. कुमावत की पुस्तक गीतोक्त शांति की प्राप्ति का लोकार्पण

उज्जैन। गीता किसी एक धर्म के लिए नहीं है। समस्त मानव कल्याण के लिए रची गई है। मानव कल्याण का सार गीता में निहित है। गीता पर यदि हम बात करते हैं तो ईश्वर की चर्चा ही होती है।
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मन को शांति प्रदान करने का काम गीता करती है। गीता हमें निष्काम कर्म करने का संदेश देती है। कर्म करते रहें तथा प्रभु का स्मरण भी करते रहें, यही गीता का शाश्वत संदेश है। यह बात पूर्व संभाग आयुक्त डॉ. मोहन गुप्त ने श्रीमद्भागवदगीता पर आधारित प्रो. बीके कुमावत द्वारा लिखित पुस्तक गीतोक्त शांति की प्राप्ति के लोकार्पण अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में कही।
प्रो. कुमावत ने जिस तरह से गीता के 10 श्लोकों के आधार पर 10 अध्याय में शांति प्राप्ति के उपायों पर चर्चा की है, वह वाकई सराहनीय है। डॉ. शिव चौरसिया ने कहा कि गीता एक अनमोल मणि है।
भगवान श्रीकृष्ण की वाणी गीता है। आज के युग में शांति प्राप्त करना बहुत कठिन काम हो गया है। डॉ. श्याम सुंदर निगम की 7वीं पुण्यतिथि पर उपस्थित प्रबुद्धजनों ने उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की।
इस अवसर पर संयुक्त संचालक जनसंपर्क विभाग भोपाल पंकज मित्तल, स्वाध्याय मंडल के सूरजभान गुप्ता एवं स्वाध्याय मंडल की संरक्षिका स्नेहलता निगम, इंदरसिंह चौधरी उपस्थित थे। संचालन डॉ. प्रवीण जोशी ने किया। आभार पं. राजेन्द्र व्यास ने माना। यह जानकारी डॉ. प्रवीण जोशी ने दी।









