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शनि लोक के लिए 71.76 करोड़ का टेंडर जारी, 18 महीने में तैयार करने का लक्ष्य

श्री महाकाल लोक के बाद दूसरे बड़े आध्यात्मिक केंद्र की तैयारी

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। भगवान महाकाल की नगरी में पर्यटन को नई ऊंचाइयां देने के की दिशा में अब श्री महाकाल लोक की तर्ज पर एक ओर लोक बनाने की तैयारी की जा रही है। इंदौर रोड पर त्रिवेणी स्थित अतिप्राचीन शनि मंदिर परिसर में करीब 21 हजार वर्गमीटर क्षेत्र में विकसित की जाने वाली इस परियोजना के लिए उज्जैन स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने 71.76 करोड़ रुपए का टेंडर जारी कर दिया है। इसे पूरा करने के लिए 18 माह का समय तय किया गया है। शनि लोक के बनने के बाद महाकाल लोक की तर्ज पर देशभर से आने वाले पर्यटकों को एक और भव्य आध्यात्मिक परिसर मिलेगा।

दरअसल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसी वर्ष जनवरी में इस परियोजना को मंजूरी देते हुए कुल 140 करोड़ रुपए स्वीकृत किए थे। परियोजना के अनुसार शनि लोक मेें पारंपरिक, धार्मिक एवं आधुनिक इंजीनियरिंग का संगम देखने को मिलेगा। इसमें बेसाल्ट और राजस्थान के बंशी पहाड़ पत्थरों से मोनोलिथिक मंदिर संरचना तैयार की जाएगी जिसमें नवग्रहों की महिमा को दर्शाती नक्काशीदार कलाकृतियां होंगे।

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यह होगा परिसर में
परिसर में थ्री-डी पत्थर जालियां, भव्य प्रवेश द्वार और सांस्कृतिक प्रांगण बनाए जाएंगे। सुव्यवस्थित लाइन प्रबंधन, बैठक व्यवस्था, आधुनिक सार्वजनिक सुविधाएं और घाटों का सौंदर्यीकरण किया जाएगा। इसके अलावा पूरे क्षेत्र में सीसी रोड, पैदल पथ, लैंडस्केपिंग और जल निकासी की बेहतर व्यवस्था विकसित की जाएगी। स्मार्ट एलईडी लाइटिंग, सीसीटीवी कैमरे, पब्लिक एड्रेस सिस्टम और फायर सेफ्टी उपकरण लगाए जाएंगे।

पर्यटन और इकोनॉमी बढ़ेगी
महाकाल लोक के बनने के बाद पर्यटकों की संख्या में रिकॉर्डतोड़ इजाफा हुआ है जिससे होटल, रेस्टोरेंट सहित अन्य कारोबारों को बूस्ट मिला है जिससे शहर की इकोनॉमी में भी इजाफा हुआ है। इसी तरह शनि लोक के बनने के बाद पर्यटकों की संख्या में और इजाफा जिससे अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और रोजगार के नए अवसर बनेंगे। सिंहस्थ 2028 के मद्देनजर यह परियोजना काफी महत्वपूर्ण है जो उज्जैन को पर्यटन के क्षेत्र में अलग मुकाम पर स्थापित करेगी।

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पर्यावरण संरक्षण पर रहेगा फोकस
शनि लोक परियोजना के तहत पर्यावरण संरक्षण पर विशेष फोकस रहेगा। इसके तहत मूविंग मीडिया बायो रिएक्टर तकनीक आधारित सीवेज ट्रीटमेंट प्लान स्थापित किया जाएगा जिससे उपचारित पानी का इस्तेमाल बागवानी और हरित क्षेत्र के विकास के लिए किया जा सकेगा।

अतिप्राचीन है मंदिर

यह मंदिर अतिप्राचीन है। मान्यता है कि मंदिर की स्थापना सम्राट विक्रमादित्य ने की थी। बताया जाता है कि सम्राट विक्रमादित्य की जब साढ़ेसाती खत्म हुई थी तब शनि महाराज विक्रमादित्य पर प्रसन्न हुए और यहां सारे ग्रह एक साथ प्रकट हुए। इस मंदिर में श्रद्धालुओं की गहरी आस्था है। यहां पर मुख्य शनिदेव की प्रतिमा के साथ-साथ ढैय्या शनि की भी प्रतिमा स्थापित है। यहां आने वाले श्रद्धालु अपनी मनोकामना के लिए शनिदेव पर तेल चढ़ाते हैं। साढ़ेसाती और ढैय्या की शांति के लिए शनिदेव को तेल से अभिषेक किया जाता है। शनिश्चरी अमावस्या एवं अन्य मौके पर यहां श्रद्धालुओं की जमकर भीड़ रहती है।

शनि लोक परियोजना एक नजर में

बेसाल्ट और बंशी पहाड़ पत्थरों से मोनोलिथिक मंदिर निर्माण

थ्री-डी जाली, भव्य प्रवेश द्वारा और धार्मिक मूर्तियों के साथ आकर्षक नक्काशी

सुव्यवस्थित लाइन प्रबंधन, बैठक व्यवस्था और आधुनिक सार्वजनिक सुविधाएं

घाटों का सौंदर्यीकरण, लैंडस्केपिंग व पैदल पथ

मूविंग मीडिया बायो रिएक्टर तकनीक आधारित सीवेज ट्रीटमेंट प्लान

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