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अधिक मास 17 मई से शुरू, जानें तिथि और पवित्र महीने के नियम

इस बार हिंदू कैलेंडर का तीसरा महीना ज्येष्ठ बहुत खास है। इस माह में अधिक मास लग रहा है, जिससे यह 28 या 30 दिनों का न होकर तकरीबन 60 दिनों का होगा। अधिकमाह को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। ज्येष्ठ अधिक मास की शुरुआत 17 मई से होगी और यह 15 जून तक चलेगा। एक माह की अवधि में पूजा-पाठ, दान और साधान का अहम स्थान होता है। हालांकि, इस अवधि में मांगलिक और शुभ कार्यों पर रोक रहती है। आइए जानें इस माह में क्या करना चाहिए और किन चीजों से बचना चाहिए ?

 

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क्या है अधिक मास और ये क्यों पड़ता है?
हिंदू पंचांग चंद्रमा की गति पर आधारित होता है, जबकि साल की गणना सूर्य से होती है। इसी कारण दोनों में थोड़ा अंतर आ जाता है। इस अंतर को संतुलित करने के लिए हर 2-3 साल में एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है, जिसे अधिकमास कहते हैं। जब किसी महीने में सूर्य की संक्रांति नहीं होती, तब वह महीना अधिकमास बन जाता है।

अधिक मास को क्यों कहते हैं पुरुषोत्तम मास

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पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस अतिरिक्त महीने को ‘मलमास’ होने के कारण कोई भी देवता अपना स्वामित्व नहीं देना चाहते थे. तब भगवान विष्णु ने इसे अपना नाम दिया और इसके अधिपति बन गए. भगवान विष्णु का एक नाम ‘पुरुषोत्तम’ है, इसीलिए इसे पुरुषोत्तम मास कहा जाने लगा. इस माह में किए गए पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान का फल अन्य महीनों की तुलना में कहीं अधिक होता है.

अधिकमास में क्या करें 

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  • इस पवित्र महीने में भगवान विष्णु की उपासना का विशेष महत्व होता है।
  • ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करने से मानसिक शांति और पुण्य लाभ मिलता है।
  • दान-पुण्य जैसे अनाज, जल, वस्त्र और दीपदान करना अत्यंत शुभ माना गया है।
  • श्रीमद्भागवत कथा और गीता का पाठ करने से आध्यात्मिक उन्नति होती है।
  • पवित्र नदियों में स्नान करना या घर पर गंगाजल मिलाकर स्नान करना भी लाभकारी माना जाता है।
  • इस दौरान सात्विक जीवन और साधना का पालन करना आत्मिक शुद्धि देता है।

अधिकमास में क्या नहीं करें

  • अधिकमास में किसी भी प्रकार के मांगलिक कार्य जैसे विवाह, सगाई, मुंडन, जनेऊ संस्कार और गृह प्रवेश नहीं करने चाहिए।
  • नया व्यवसाय शुरू करना या नई नौकरी जॉइन करना इस समय टालना उचित माना जाता है।
  • संपत्ति, वाहन या मकान से जुड़ी नई खरीदारी से भी बचना चाहिए।
  • तामसिक भोजन जैसे मांस, मदिरा, लहसुन और प्याज का सेवन वर्जित माना गया है।
  • इस दौरान व्रत शुरू या समाप्त नहीं करना चाहिए। साथ ही झूठ, विवाद और अपमान से बचना जरूरी है क्योंकि इसका प्रभाव और अधिक बढ़ सकता है।

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