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सावन कल से, महाकाल मंदिर में बदलेगी व्यवस्था

सोमवार को तडक़े २.३० और अन्य दिन 3 बजे खुलेंगे गर्भगृह के पट

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अक्षरविश्व न्यूज|उज्जैन। भगवान शिव को प्रिय सावन का महीना गुरुवार से शुरू हो रहा है। उज्जैन के लिए सावन का महत्व इसलिए भी ज्यादा है कि यहां भूतभावन महाकाल विराजे हैं। देश-दुनिया से उनके दर्शन के लिए यूं तो साल भर भक्त आते हैं लेकिन सावन केे महीने में यह संख्या आम दिनों की तुलना में १० गुना अधिक हो जाती है। ऐसे में श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंधन ने भी सावन की जोरदार तैयारी की है। श्रद्धालुओं को सुगम दर्शन तो कराए ही जाएंगे, अन्नक्षेत्र में हर सोमवार फरियाली भोज परोसा जाएगा। दक्षिण से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए मंगल और शुक्रवार को दक्षिण भारतीय व्यंजन (इडली, सांबर, पोंगल आदि) का स्वाद चखाया जाएगा।

बाबा महाकाल के दर्शन के लिए आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रबंध समिति और जिला प्रशासन ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। 30 जुलाई से 7 सितंबर तक प्रतिदिन सुबह 3 बजे गर्भगृह के पट खोले जाएंगे। भस्म आरती प्रतिदिन सुबह 3 से 5 बजे तक होगी। जबकि सोमवार के दिन सुबह 2.30 बजे पट खोले जाएंगे और सुबह 4.30 बजे तक भस्म आरती होगी। 8 सितंबर से मंदिर की समय-सारिणी पूर्ववत हो जाएगी।

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400 जवान संभालेंगे टै्रफिक शहर में कई मार्ग रहेंगे बंद

भगवान महाकाल की सवारी, कांवड़ यात्राओं और बढ़ते यातायात दबाव के बीच शहर की अंदरूनी सडक़ों के चौड़ीकरण और निर्माण कार्यों को देखते हुए पुलिस ने पूरे महीने का विशेष ट्रैफिक प्लान तैयार किया है। यातायात व्यवस्था संभालने के लिए करीब 400 ट्रैफिककर्मी (जिनमें 120 ट्रैफिककर्मी और लगभग 280 नवआरक्षक शामिल हैं) तैनात
किए गए हैं।

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दर्शनार्थियों के प्रवेश और निर्गम की व्यवस्था

सामान्य दर्शनार्थियों का प्रवेश त्रिवेणी संग्रहालय के समीप नंदी द्वार, श्री महाकाल महालोक, मानसरोवर भवन फेसिलिटी सेंटर-1, टनल से होते हुए कार्तिक मंडपम और गणेश मंडपम मार्ग से होगा। नीलकंठ प्रवेश द्वार से आने वाले श्रद्धालु मानसरोवर भवन से प्रवेश कर इसी मार्ग से दर्शन करेंगे तथा निर्माल्य द्वार अथवा नवीन आपातकालीन निर्गम द्वार से बाहर निकलेंगे।

शीघ्र दर्शन और जल अर्पण- शीघ्र दर्शन के लिए गेट नंबर १ और 5 तय किए गए हैं। हरसिद्धि चौराहा या गेट १ से आने वाले श्रद्धालु विश्रामधाम सभा मंडपम और गणेश मंडपम मार्ग से दर्शन कर निर्गम द्वार से बाहर जाएंगे। श्रद्धालुओं के लिए जल अर्पण की व्यवस्था सभा मंडप और कार्तिकेय मंडपम में स्थापित जलपात्रों के माध्यम से रहेगी।

कांवड़ यात्रियों को मंगलवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार को गेट १ और हरसिद्धि चौराहा के विशेष दर्शन मार्ग से प्रवेश मिलेगा।

वाहन पार्किंग व्यवस्था

चार पहिया वाहन- भील समाज पार्किंग, कर्कराज, चारधाम, मन्नत गार्डन (इम्पीरियल), और कार्तिक मेला ग्राउंड (बस एवं भारी वाहनों के लिए)।

दोपहिया वाहन- हरसिद्धि पाल, क्षीरसागर मैदान, और टंकी चौक (मल्टीलेवल पार्किंग)।

पार्किंग फुल होने पर लालपुल और कार्तिक मेला मैदान का उपयोग किया जा सकेगा।

बाहरी श्रद्धालुओं के लिए महाकाल मंदिर आने-जाने के आसान रूट

आने का रूट हरिफाटक से जंतर-मंतर, लालपुल, कर्कराज (भील समाज धर्मशाला पार्किंग), नृसिंह घाट, हरसिद्धि होते हुए मंदिर पहुंच सकेंगे।

दर्शन के बाद निकासी- कर्कराज पार्किंग से लालपुल, चिंतामण ब्रिज, बायपास, आस्था चौराहा और महामृत्युंजय द्वार से जाना बेहतर होगा।

कालभैरव जाने के आसान रास्ते

मार्ग -१: हरिफाटक से जंतर-मंतर, लालपुल, शंकराचार्य चौराहा, कालिदास उद्यान, रंजीत हनुमान, मोजमखेड़ी रोड होते हुए कालभैरव मंदिर।

मार्ग-२: कर्कराज पार्किंग से नृसिंह घाट, रंजीत हनुमान, मोजमखेड़ी होते हुए कालभैरव मंदिर।

इंदौर, देवास, भोपाल मार्ग से- इंजीनियरिंग कॉलेज, पाइप फैक्ट्री चौराहा, विक्रम नगर, पाण्ड्याखेड़ी, अनाज मंडी, मकोडिय़ाआम, खाक चौक, जेल तिराहा होते हुए कालभैरव मंदिर पहुंचना आसान होगा।

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